Amazon और Netflix के मुकाबले Apple ..

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Image Courtesy : Apple

कैलिफ़ोर्निया , एप्पल के हेड ऑफिस स्थित स्टीव जॉब्स थिएटर सोमवार को होने वाले आयोजन के लिए पूरी तरह से तैयार है . ऐसी संभावना बताई जा रही है कि इस बार एप्पल अपने तरीके से ” न्यूज़ और एंटरटेनमेंट ” का पैकेज ले कर आ रहा है जहाँ ख़बरे , मैगज़ीन , सीरियल और यहाँ तक की मूवीज भी उपलब्ध होंगे . दुनिया के सब से बड़ी कंपनी का एंटरटेनमेंट और मीडिया में पहला कदम होगा , जाहिर तौर पर अमेज़न और नेटफ्लिक्स जैसे कॉम्पिटिटर के लिए यह बहुत बड़ी चुन्नौती होगी .

कुछ बड़ा करने में विस्वास करती है एप्पल : एप्पल जैसे कम्पनियाँ जब भी मैदान में आती है तो उनका विज़न और प्रोडक्ट पूरी तरह से गेम चेंजर होता है . म्यूजिक इंडस्ट्री आईपॉड के आने के बाद बिलकुल ही बदल गई और वॉकमेन और CD प्लयेर गुज़रे ज़माने के बात हो गए . इतना ही नहीं आईफोन ने पूरी तरह से मोबाइल इंडस्ट्री को बदल कर रख दिया . नोकिआ जैसे कंपनी को अपना मोबाइल बिज़नेस बेच देना पड़ा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनी भी इसका मुकाबला नहीं कर पायी .

स्टीव जॉब्स के बाद की चुनौती : ” इनोवेशन ” के लिए विख्यात एप्पल के सामने स्टीव जॉब्स के गुज़रने के लगभग ८ वर्षो के बाद कुछ नया कर गुजरने की चुनौती है . सच्चाई यह है की एप्पल के हर प्रोडक्ट पे स्टीव की छाप है और अब उनके न रहने के बाद कंपनी के ऊपर वैसे ही इन्वेटिव प्रोडक्ट लाने का भरी दबाव है जिसके लिए वो जानी जाती है .

प्रोडक्ट के मुकाबले सर्विस : जैसे की उम्मीद है की आज के दिन एप्पल इंकॉर्पोरेटेड मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए स्ट्रीमिंग सर्विस की घोषणा करने वाला है , अमेरिकी मीडिया में इस बात को ले कर तरह तरह के कयास लगाए जा रहे की आने वाले दिनों इसका क्या प्रभाव होगा . ऐसा भी बतलाया जा रहा है की एप्पल की ओर्जिनल TV सर्विस फ्री नहीं होगी और इसके लिए आप को लगभग १० डॉलर तक देने पड़ सकते है . फिलहाल देखने की बात है कि एक प्रोडक्ट कंपनी के लिए मीडिया इंडस्ट्री में आना उस कंपनी कि ब्रांडिग पर कितना प्रभाव डालता है खास कर उस समय जब कंपनी का नाम एप्पल इंकॉर्पोर्टएड हो .

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