भारत और एप्पल में कब बने गी बात !

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Image Courtesy : Apple

नई दिल्‍ली। विश्‍वस्‍तरीय ब्रांड एप्‍पल दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्‍मार्टफोन बाजार भारत में अपनी पकड़ बनाने में कमजोर साबित हुआ है। भारत स्‍मार्टफोन बाजार में पिछले साल ही अमेरिका को पीछे छोड़ चीन के बाद दूसरे पायदान पर आ खड़ा हुआ है। भारत में तेजी से बढ़ते स्‍मार्टफोन बाजार में जियामी रेड्मी 5ए जैसे मॉडल एप्‍पल के मुकाबले ग्राहकों को ज्‍यादा आकर्षित कर रहे हैं। भारतीय बाजार में आ रही इन चुनौतियों को देखते हुए एप्‍पल ने बिंदुवार पांच योजनाएं तैयार की हैं। जिन पर ध्‍यान देकर वह भारतीय बाजार में अपनी पकड़ बनाना चाहता है। भारतीय बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करने की योजना बना रही एप्‍पल हाल ही में दुनिया की पहली हजार अरब (एक ट्रिलियन) डॉलर की सार्वजनिक कंपनी बनी है।

मूल्य निर्धारण की चुनौती
भारत में किसी भी कंपनी के लिए मूल्‍य निर्धारण एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। स्‍मार्टफोन के लिए भारतीय ग्राहक औसत 10 हजार रुपये तक भुगतान करते हैं। भारतीय बाजार में प्रतिस्‍पर्धा कर रही स्‍मार्टफोन कंपनियों के द्वारा दी जा रही शून्‍य ब्‍याज भुगतान और कैशबैक आफर के बावजूद एप्‍पल भाग्‍यशाली है कि बिकने वाले 1 हजार स्‍मार्टफोन में से 25 सेट उसके होते हैं। iPhone SE एप्‍पल का सबसे सस्‍ता मॉडल है, जो अन्‍य कंपनियों के मॉडलों के मुकाबले दोगुना कीमत का है। जबकि बेहतर कैमरा और अधिक भंडारण क्षमता के साथ जियामी रेड्मी 5ए 10 हजार तक मिल जाता है।

भारत में एप्पल की योजना
-कीमतों को कम करने का प्रयास।
-लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने में विफल रहे विक्रेताओं की आपूर्ति में कटौती करना।
-ग्राहक आईफोन को कैसे आसानी से प्रयोग कर सकता है, इसको बताने के लिए कर्मियों को प्रशिक्षित करना।
-स्‍टोरों की बेहतर डिस्‍पले और ब्रॉंडिंग।
-नई दिल्ली, बेंगलुरू और मुंबई में तीन एप्पल स्टोर खोलना।

एप्‍पल भारतीय बाजार के अनुरुप अपने को ढाल पाने में विफल रहा है और वह आज तक भारतीय ग्राहकों की नब्‍ज नहीं पकड़ पाया। स्‍थानीय भाषाओं के उपयोग को लेकर लंबे समय से भारतीय ग्राहकों को शिकायत है। इसके अलावा एप्पल मैप से गंत्‍व्‍य तक पहुंचना मुश्किल है। एप्पल लंबे समय से भारत में खुदरा स्टोर खोलना चाहता था, लेकिन भारत में अपने उत्पादों की 30% निर्माण करने की सरकारी औपचारिकता को पूरा करने में असमर्थ रहा है।

हाल ही में आई रिपोर्टों के अनुसार, अगर दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफ़ोन निर्माताओं की बात करें तो दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग और चीन की कंपनी हुआवे के बाद एप्पल तीसरे स्थान पर है। वहीं, एप्पल के लिए इस साल भारतीय कारोबार अच्छा नहीं रहा है। खासतौर से प्रारंभिक अनुमानों में बताया गया है कि एप्पल ने साल 2018 की पहली छमाही में भारतीय बाजार में महज 10 लाख डिवाइसों की ही बिक्री की है, जबकि साल 2017 की समान अवधि ने एप्पल ने भारत में 31 लाख से अधिक आईफोन्स की बिक्री की थी। सीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक, केवल पंजाब और केरल में एप्पल शीर्ष की तीन स्मार्टफोन ब्रांड में शामिल रही।

माना जाता है कि एप्पल इंडिया अपने ग्राहकों से जुड़ने पर अधिक ध्यान नहीं देती, ना ही भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र या प्रभावशाली लोगों से जुड़ती है। अगर कंपनी ऐसा करना शुरू कर दे तो उसके ग्राहकों में तेजी आएगी। एप्पल को संभावित ग्राहकों को शिक्षित करना चाहिए। उन्हें आईफोन के विशिष्ट फीचर्स के बारे में जानकारी देनी चाहिए। उदाहरण के लिए बात जब निजता और सुरक्षा की आती है तो इसमें एप्पल का कोई सानी नहीं है। लेकिन भारत में एप्पल अपनी विशेषताओं को ग्राहकों तक पहुंचा ही नहीं पाती।

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