मेरा वोट उसे

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file photo source: ani

जो सीमाओं पर शहीद होने वाले बेटों की मौत के कारणों का आडिट की मांग करे।
जो संसद में दहाड़ सकें कि हर सैनिक के शहीद होने की जिम्मेदारी तय हो।
जो हिम्मत कर सके कि सैनिकों को शहीद होने पर मुआवजा नहीं अच्छे उपकरण दो।
जो संसद में हमारे आक्सीजन बैंक के बदले में ग्रीन बोनस की बात उठा सके।
जो पंचायती राज अधिनियम के संशोधन को लागू करने की बात कर सके।
जो महिलाओं के आरक्षण और जनपक्षधरता पर जोर दें।
जो ईमानदारी से एमपीलैड फंड का इस्तेमाल अपने क्षेत्र में कम से कम 90 प्रतिशत कर सकें।
जो विकास कार्यों में अपना कमीशन न मांगे।
जो पहाड़ के जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की बात करें।
जो भारत की लोकभाषाओं और लोकसंस्कृतियों को संरक्षित करने की बात करें।
जो केंद्रीय पोषित योजनाओं को सही से अपने संसदीय क्षेत्र में लागू कर सके।
जो टिहरी और पंचेश्वर जैसे बड़े बांधों का विरोध कर सकें।
जो जनता का दर्द समझें, और युवाओं को रोजगार देने की दिशा में काम कर सकें।
जो वन अधिनियम का सदुपयोग और मानव- वन्य जीव संघर्ष का समाधान कर सकें।
जो उत्तराखंड में भी शेर हो और केंद्र में भी। अक्सर केंद्र में सभी शेर बकरी बन जाते हैं।

[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से]

तो आओ अब लौट चलें दूरदर्शन के पास

 

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