धधकता पहाड़ – पार्ट एक: भीख मांगने लंदन चले फारेस्ट चीफ!

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  • इंटरनेशनल भिखारी हैं वन विभाग के अधिकारी
  • हरक सिंह बेकार में ही पीसीसीएफ पर भड़क रहे

पिछले साल मई में मैं उत्तरकाशी के एनआईएम की कैंटीन में बैठा था। वहां उत्तरकाशी के डीएफओ नाम ध्यान नहीं आ रहा भी मौजूद थे। मैंने पूछा आग पर कितना नियंत्रण है। उन्होंने बड़ी साफगोई से कहा कि जहां तक सड़क है, आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन सघन वन और माडरेट पर नियंत्रण पाना आसान नहीं है। इस दौरान अचानक ही एनआईएम परिसर में भी आग लग गई। एनआईएम की टीम ने इस पर तो काबू कर लिया लेकिन वरुणावर्त कई दिनों तक धधकता रहा। अब तक प्रदेश में एक हजार हेक्टेयर से भी अधिक भूमि वनाग्नि की चपेट में आ गई है।

हर साल ही आती है, इसमें नया क्या है? हम तो आदी हो गए हैं, जैसे 26 जनवरी आती है, 15 अगस्त आता है, होली-दिवाली आती है वैसे ही वनाग्नि भी आती है। इसमें नया यह है कि हमारे प्रदेश वन महकमे के जो सबसे बड़े अधिकारी जयराज ही हैं तो वे महाशय ही अपने तीन गरीब दोस्तों को लेकर लंदन जाना चाहते हैं। लंदन में जियोलॉजिकल सोसाइटी आफ लंदन के आगे गिड़गिड़ाएंगे कि इंटरनेशनल भिखारी आए हैं, वनों की लकड़ी, उप-खनिज और पर्यावरण को ताक पर जितना कमाया है वो कम है तो प्लीज वि नीड मोर मनी टू सर्वाइव। प्लीज बैग अस। जब भीख मांगने की आदत पड़ जाती है तो जयराज जैसे निकम्मे अफसर पैदा होते हैं। जाने दो लंदन और पोलैंड। मांगने दो भीख। भिखारी का पेट कितना भी भर लो, हथेली आगे ही पसारता है। वन मंत्री हरक सिंह रावत को यह गुस्सा आ रहा है कि आखिर वन मुखिया उनके बिना ही विदेश भीख मांगने क्यों जा रहे थे? उन्हें भी साथ लेते। हरक सिंह रावत को क्या पता नहीं कि हर साल वन में आग लगती है। मैं प्रदेश की इस वनाग्नि के खेल पर सीरीज शुरू कर रहा हूं। आपको आश्चर्य होगा कि आग लगाने में फारेस्ट गार्ड से सबसे बड़े अधिकारी की मिली-भगत भी होती है।

[अगले भाग में – जंगलों की विविधता और वन महकमे का भ्रष्टाचार]

[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से]

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