फूलदेई त्योहार लाया खुशी के चेहरे पर लंबी मुस्कान

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  • थैंक्यू धाद, यह खुशी जैसे बच्चों में खुशी बांटने के लिए
  • युवा धाद ने गरीब बच्चों के साथ मनाया फूलदेई त्योहार

हरिद्वार की नौ साल की खुशी राजपुर रोड के पूर्व माध्यमिक स्कूल में चैथी कक्षा की छात्रा है। उसकी मां कपड़ों पर प्रेस करती है और पिता हलवाई का छोटा-मोटा काम करते हैं। खुशी चार बहनों में सबसे बड़ी है। उसकी एक बहन रिया तीसरी कक्षा में इसी स्कूल में है। घर का गुजारा मुश्किल से होता है तो मां-बाप ने इस स्कूल में दाखिला करा दिया और फिर दोनों बहनों को उनके हाल पर छोड़ दिया।

स्कूल के प्रधानाचार्य हुकुम उनियाल इस तरह के गरीब बच्चों को शिक्षा के साथ नि:शुल्क हॉस्टल और खाना भी उपलब्ध कराते हैं। इस स्कूल में 197 बच्चे हैं। 90 प्रतिशत से अधिक के या तो मां नहीं है या बाप नहीं है, कई के तो दोनों ही नहीं हैं। ऐसे में जब धाद संस्था के युवा विंग ने इस स्कूल में फूलदेई त्योहार मनाया तो इन बच्चों के चेहरों पर खुशी देखने वाली थी। कविता और चित्रकला प्रतियोगिता हुई। बच्चों ने फूलों पर लिखा और अपनी कल्पनाशीलता को दर्शाया। मां-बाप से दूर इन बच्चों को देख हूक सी उठती है। नारी सम्मान से सम्मानित माधुरी दीदी ने इन्हें फूलदेई का महत्व बताया और गाकर भी सुनाया। कुछ बच्चे सुन रहे थे और कुछ नहीं। सवाल यह नहीं है, लेकिन धाद ने इन बच्चों को जो मुस्कराने का अवसर दिया, उसके लिए धाद संस्था को थैक्यू बोलना तो बनता है। शुक्रिया धाद। सच्चा त्योहार वही है जो मासूम बच्चों के चेहरों पर खुशी लाए।

[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से]

काश, हर डाक्टर नवीन बलूनी जैसा होता!

 

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