जानिए कौन थे आचरेकर, उनके लिए सचिन ने क्‍या भावनाएं व्‍यक्‍त की

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photo source: Twitter/ @sachin_rt

नई दिल्‍ली। क्रिकेट जगत को सचिन तेंदुलकर जैसा नायाब सितारा देने के लिए रमाकांत विट्ठल आचरेकर को हमेशा याद रखा जाएगा। आचरेकर का जन्‍म 1932 में मुंबई में हुआ था। क्रिकेट के करियर से कहीं ज्‍यादा आचरेकर कोचिंग करियर में सफल रहे। उनकी कोचिंग में कई क्रिकेट सितारों का उदय हुआ।

तभी सचिन ने उन्‍हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आचरेकर सर की मौजूदगी में स्‍वर्ग में क्रिकेट और समृद्ध होगा। मैंने अन्‍य छात्रों की तरह उनसे क्रिकेट का कखग सीखा था। उन्‍होंने मेरी ऐसी आधारशिला रखी, जिसके दम पर मैं इस मुकाम पर खड़ा हूं। अपनी जिंदगी में उनके योगदान को मैं अपने शब्‍दों में व्‍यक्‍त नहीं कर सकता। क्रिकेट के भगवान ने आगे कहा कि पिछले महीने मैंने अपने गुरु और उनके कुछ छात्रों के साथ कुछ समय बिताया था। जहां हम सबने पुराने दिनों को याद किया और हंसी मजाक के पलों के बीच वह खूबसूरत समय बिताया।

1943 में क्रिकेट खेलना शुरू करने वाले आचरेकर को छात्रों को कोचिंग देने के दौरान ख्‍याति मिलनी शुरू हुई। मुंबई क्रिकेट टीम के चयनकर्ता रहे आचरेकर मुंबई के दादर में स्थित शिवाजी पार्क में युवा क्रिकेटरों को तराशा करते थे। उन्‍होंने सचिन, विनोद कांबली, अजीत अगरकर, प्रवीण आमरे, समीर दीघे, बलविंदर सिंह संधू और चंद्रकांत पंडित जैसे कई दिग्‍गज‍ सितारे क्रिकेट जगत को दिए।

अपने क्रिकेट करियर में आचरेकर ने 1945 में न्यू हिंद स्पोर्ट्स क्लब के लिए भी खेले। वे गुल मोहर मिल्स, यंग महाराष्ट्र इलेवन और मुंबई पोर्ट जैसी टीमों का भी हिस्‍सा रहे। 1963-64 में मोईन-उद-दौला टूर्नामेंट में उन्‍होंने अपना एकमात्र प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैच भी खेला था। ये मैच उन्‍होंने अखिल भारतीय स्टेट बैंक की तरफ से हैदराबाद के खिलाफ खेला था।

आचरेकर ने शिवाजी पार्क में कामथ मेमोरियल क्रिकेट क्लब की स्‍थापना की थी। यहां उन्‍होंने कई क्रिकेटरों को क्रिकेट के गुर सिखाए और उनके भविष्‍य को संवारा। इस क्‍लब को अब उनकी बेटी कल्पना मुकर अपने पति दीपक के साथ मिलकर चला रही हैं। सचिन के गुरु ने अपना पूरा जीवन क्रिकेटरों के भविष्‍य को उज्‍जवल बनाने के लिए समर्पित कर दिया। ‘रमाकांत आचरेकर: मास्टर ब्लास्टर के मास्टर’ नाम से लिखी पुस्‍तक में पत्रकार कुणाल पुरंदरे उनकी जिंदगी के अनछुए पहलों को भी बखूखी उकेरा है। यह आचरेकर की एकमात्र जीवनी है। सचिन को विश्‍व के महानतम बल्‍लेबाजों की श्रेणी में खड़ा करने में आचरेकर के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। 1980 के समय में उन्‍होंने ही सचिन की प्रतिभा को पहचाना और उन्‍हें उभारा। उन्‍होंने सचिन को क्रिकेट की एक से एक बारिकी सिखाई। उन्‍होंने सुनिश्चित करने की कोशिश की मुंबई के लिए वे ज्‍यादा से मैचों में उतरे।

आचरेकर स्‍कूल से छुट्टी होने के बाद सचिन को अपने स्‍कूटर पर बैठाते थे और निकल पड़ते थे मास्‍टर ब्‍लास्‍टर को मैच खिलाने। सचिन की प्रतिभा के कायल आचरेकर ने 1993 में क्रिकेट के भगवान को कांबली और आमरे से कहीं ज्‍यादा प्रतिभाशाली बताया था।

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