पप्पू पास हो गया, टीम त्रिवेंद्र फेल

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file photo source: ANI
  • मुझे चांद चाहिए की तर्ज पर दिखे खिसियाए त्रिवेंद्र
  • राहुल के आक्रामक तेवर से डबल इंजन बेपटरी

सवा दो साल पहले देहरादून के इसी परेड ग्राउंड से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि भाजपा आएगी तो डबल इंजन सरकार होगी और विकास को पंख लगेंगे। जनता ने दिल खोलकर भाजपा को वोट दिये और 70 में से 57 विधायक। पांच सांसद तो पहले से ही थे। विकास के नाम पर पिछले दो साल में सीएम त्रिवेंद्र रावत अपने गांव खैरासैंण की तीन किलोमीटर की सड़क नहीं बना सके, अपने भतीजे के लिए नौकरी का जुगाड़ नहीं कर सके। उनको चाटुकारों ने घेरा हुआ है। उन्हें सलाहकार नौकरशाह दंपति भटका रहे हैं। सांसदों के साथ टीम त्रिवेंद्र का 36 का आंकड़ा है। भाजपा के सांसद इतने बेकार साबित हुए कि गोद लिए गांवों की हालत नहीं बदल सके। एमपीलैड फंड का अधिकांश भाग बिना खर्च किए रह गया।

प्रदेश अध्यक्ष अजय भटृट को फतकी बदलने का शौक है, वह प्रदेश अध्यक्ष कम और प्रवक्ता अधिक लगते हैं। थावरचंद गहलोत किसी काम के नहीं हैं। यदि त्रिवेंद्र और उनकी टीम ने जनरल खंडूड़ी को मनाया होता तो शायद मनीष कांग्रेस में नहीं जाते। मनीष ही नहीं 36 अन्य प्रमुख लोग भी कांग्रेस में गए। भाजपा में रहे चैबट्टाखाल के युवा व प्रभावशाली नेता कवींद्र इस्टवाल भी कांग्रेस में शामिल हुए, क्योंकि भाजपा ने भी उन्हें तवज्जो नहीं दी। राहुल गांधी ने जिस आक्रमकता से कल मोदी और उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर निशाना साधा, वो काबिले तारीफ है। उनके भाषण में जबरदस्त लय थी। बहुत ही सधा हुआ और मारक भाषण था। सीएम त्रिवेंद्र तो इस भाषण का काउंटर भी नहीं कर सके, यही कहते रहे कि राहुल को मोदी जी कहना चाहिए था। हंसी आ रही है उनके बयान पर, त्रिवेंद्र जी का यह बयान ऐसे लग रहा है कि जैसे कोई बच्चा रात को चांद देखता है और अपनी मां से जिद करता है कि मुझे चांद चाहिए।

[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से]

बुरा न मानो होली है! पीएम की कुर्सी के लिए अभी अनफिट हैं राहुल

 

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