लक्ष्य निर्धारण (Goal Set)

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“Arise, awake and stop not till the goal is reached.”
—Swami Vivekananda
अर्थात् उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रूका।

जीवन में सफल बनने के लिए सर्वाधिक आवश्यक है एक निर्धारित ‘लक्ष्य’। लक्ष्य किसी भी रूप में हो सकता है। यह आप पर निर्भर करता है, कि आप किस लक्ष्य को लेकर सफलता प्राप्त करना चाहते हो। लक्ष्य पूर्णतः स्पष्ट होना चाहिए। ‘लक्ष्य’ के मामले में कभी भी दोहरी मानसिकता (Double Minded) नहीं होना चाहिए। अर्थात यह न सोचें कि यदि आपने यह लक्ष्य प्राप्त नहीं किया तो आप अन्य किसी लक्ष्य के लिए प्रयास करेंगे। इस स्थिति में आप के हाथ में दो विकल्प होंगे। आप मस्तिष्क को एक स्थान पर केंद्रित नहीं रख पाएंगे। ‘लक्ष्य’ प्राप्ति की प्रक्रिया के बीच आपका मस्तिष्क दूसरे विकल्प की तरफ जाएगा। पहले लक्ष्य में प्रारंभिक दौर में विफलता मिलने पर आप तुरंत दूसरे लक्ष्य की तरफ चले जाएंगे। उसमें भी आपका मन नहीं लगेगा और आप अन्य कोई तीसरा लक्ष्य चुनने का निर्णय लेंगे। ऐसा करने में मानसिक भटकाव ही उत्पन्न होता है। भटकाव में एकाग्रता भंग होती है। एकाग्रता न होने पर ‘विफलता’ ही हाथ लगती है। सदैव एक ही लक्ष्य बनाया जाए तो बेहतर रहेगा। उसका विकल्प हो तो कोई समस्या नहीं पर मन एक ओर ही लगाना चाहिए। लक्ष्य को दृश्यांकित (Visualise) करें। कल्पना करें कि यदि आपने लक्ष्य प्राप्त कर लिया तो आपकी स्थिति क्या होगी। लक्ष्य प्राप्ति किस हद तक आपके जीवन को प्रभावित करेगी, इसे जितना हो सके सोचें। लक्ष्य निर्धारण करने के पश्चात उसे प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।

उदाहरण के लिए किसी विद्यार्थी को शिक्षा-अध्ययन के दौरान ही अपने करियर का लक्ष्य निर्धारित कर लेना चाहिए जैसे उसे अध्यापक बनना है, डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी। एक स्पष्ट लक्ष्य का निर्धारण करने के उपरांत उसे प्राप्त करने के लिए भरसक प्रयास करना चाहिए। ऐसा नहीं कि पहले इंजीनियर बनने के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा की तैयारी करूंगा। यदि सफल नहीं हुआ तो प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करूंगा। यदि उसमें भी सफल नहीं हुआ तो अध्यापक तो बन ही जाऊंगा। इस स्थिति में वह सर्वप्रथम अपना समय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी में लगाएगा। एक या दो प्रयास में सफल न होने पर वह स्नातक परीक्षा पास करने के उपरांत प्रशासनिक अधिकारी बनने की तैयारी में लगेगा। इस स्थिति में उसका जो समय पहले ही इंजीनियर की तैयारी में लगा, व्यर्थ हो चुका होगा। तत्पश्चात वह स्नातक करके प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा की तैयारी करता है, उसमें भी सफल नहीं हो पाता तो उसका समय भी बर्बाद हो गया। तत्पश्चात वह अध्यापक बनने के लिए बीएड करता है। जो समय उसने नष्ट हो गया वह वापस नहीं आएगा। इससे बेहतर वह विद्यार्थी पहले ही अध्यापक का लक्ष्य निर्धारित कर लेता तो समय पर ही अध्यापक बन जाता।

इसी प्रकार अपना व्यापार करने के इच्छित व्यक्तियों में व्यापार करने को लेकर कोई निर्धारित लक्ष्य नहीं होता। वह भिन्न-भिन्न प्रकार के व्यापारों मे हाथ आजमाते रहते हैं। अंत में उनके हाथ कुछ नहीं लगता और वह हताश हो जाते हैं। वह यह नहीं देखते की व्यापार के लिए उनका कोई पूर्व निर्धारित लक्ष्य नहीं था। लक्ष्य निर्धारित करके योजनाबद्ध ढंग से उसे पूरा करने का प्रयास करते तो वे अवश्य ही सफल हो सकते थे।

इसी प्रकार कुछ व्यक्तियों में नौकरी और व्यापार को लेकर असमंजस बना रहता है कि वह नौकरी करें या व्यापार। वे नौकरी करते हैं तो उसमें मन नहीं लगता और नौकरी छोड़ व्यापार करते हैं तो व्यापार के प्रारंभिक दौर में सफलता नहीं मिलने पर उसे छोड़ पुनः नौकरी कर लेते हैं। इस प्रकार उनके जीवन की नाव इन्हीं धाराओं के बीच हिंडोले खाती रहती है। ऐसे व्यक्ति भी कभी सफलता अर्जित नहीं कर पाते। यदि वह नौकरी को ही लक्ष्य बनाकर चलते तो उसमें ही अनुभव अर्जित करते-करते एक दिन सफलता के ऊंचे मुकाम पर पहुंच सकते थे। वह व्यापार को ही लक्ष्य बना लेते तो उसमें भी सफलता प्राप्त कर सकते थे। इस दृष्टि से सफलता की प्राप्ति के लिए एक निश्चित लक्ष्य का होना अति आवश्यक है।

लक्ष्य निर्धारण में अपनी योग्यता एवं कार्य क्षमता का आंकलन करना महत्वपूर्ण। आप उसी लक्ष्य का निर्धारण करें जिसे आप प्राप्त करने मे समर्थ हों। आप पहले छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करें। उन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होने के पश्चात बड़े लक्ष्यों को निर्धारित करके, उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करें। छोटे लक्ष्यों में जैसे सुबह सैर पर जाने की आदत बनाना या किसी कार्य को एक निर्धारित समयावधि में पूरा करना। छोटे-छोटे लक्ष्यों को प्राप्त करके आपमें एक आत्मविश्वास जागेगा। इसके पश्चात् आप धीरे-धीरे बड़े लक्ष्यों को निर्धारित करके उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करें।

एक बार गुरु द्रोणाचार्य ने अपने सभी शिष्यों से एक खिलौना चिड़िया की आंख को निशाना बनाने के लिए कहा। उन्होंने बारी-बारी से कौरव एवं पांडु (पांडव) कुमारों को बुलाया सभी से उन्होंने एक ही प्रश्न कहा की तुम्हें क्या दिखाई दे रहा है। केवल अर्जुन को छोड़कर सबका उत्तर भिन्न-भिन्न था। अर्जुन ने कहा उसे तो मात्र चिड़िया की आंख ही दिखाई दे रही है। अर्जुन के इस उत्तर से पूर्णरूपेण संतुष्ट होकर गुरु द्रोण ने उस चिड़िया के खिलौने की आंख में बाण मारने के लिए कहा। इस उदाहरण से यही सीख मिलती है कि हमें सफलता के लिए सदैव अपने लक्ष्य को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। हमें मात्र चिड़िया की आंख (लक्ष्य) ही दिखाई देनी चाहिए। अन्य गौण तत्वों को कोई प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए। यही सफल व्यक्ति की विशेषता होती है।

सफलता के लिए हम सर्वप्रथम छोटे-छोटे लक्ष्यों का निर्धारण करके अपनी क्षमता एवं योग्यता का आंकलन करें। उदाहरण के रूप में यदि आपने कोई व्यापार शुरू किया है। तो आपको कुछ महीनों या फिर कुछ वर्षों के लिए अनुमानित आय का निर्धारण करना चाहिए। आप उस लक्षित आय को प्राप्त करने पर सफल हो जाते हैं, तो अगामी वर्षों के लिए उससे अधिक अनुमानित आय का लक्ष्य निर्धारित करें। यदि आरंभिक वर्षों के अनुमानित आय के लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल होते हैं। तो इस स्थिति में भी हताश होने की आवश्यकता नहीं आप उन कारणों का आंकलन करें जिनके चलते आप अनुमानित आय के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाए। इस स्थिति में घबराहट और हताशा के स्थान पर समझदारी और सूझबूझ की आवश्यकता होती है। जिसने ऐसा कर लिया उसे सफलता अवश्य ही मिलेगी। छोटे-छोटे लक्ष्यों में समय पर कार्य पूरा करना, अपने व्यवहार में परिवर्तन लाना, अच्छी आदतें डालना, अपनी कही बात पर अमल करना, ज्ञानवर्धक पुस्तके पढ़ने की आदत डालना इत्यादि भी सम्मिलित किए जा सकते है।

छोटे लक्ष्यों की प्राप्ति के पश्चात ही बड़े लक्ष्यों का निर्धारण किया जाए तो बेहतर होता है। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगन, मेहनत, समय प्रबंध तथा धैर्य इत्यादि गुणों की आवश्यकता होती है।

सफलता के लिए आवश्यक है कि आप सदैव अपने लक्ष्य के प्रति आशांवित रहे। स्वयं पर विश्वास रखें कि आप अवश्य ही एक दिन अपने लक्ष्य को प्राप्त करके रहेंगे। यदि अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाने में संशय है तो आप अपने लक्ष्य की ओर न ही बढ़े तो बेहतर है। आप में जब ‘विश्वास’ ही नहीं तो आप कैसे अपने लक्ष्य को पाएंगे। एक निराश और हताश व्यक्ति कभी किसी कारगर लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। लक्ष्य प्राप्ति के लिए निराशा और ‘हताशा’ जैसे शब्दों को अपने शब्दकोश से सदा के लिए हटा दें फिर देखें आपके जीवन में कितना चमत्कारिक परिवर्तन आता है।

आपको अपने लक्ष्य का एक सार्थक एवं स्पष्ट चित्र अपने मस्तिष्क में निर्धारित करना पड़ेगा। निरंतर अपने मस्तिष्क को संदेश देना होगा कि आप निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूर्णतः सक्षम है। मस्तिष्क में स्पष्ट एवं सार्थक चित्र निर्धारित करके आप उस दिशा में पूरी दक्षता एवं कार्यक्षमता के साथ जुट सकते हैं। लक्ष्य की तस्‍वीर स्पष्ट न होने की स्थिति में एक कशमकश ही रहेगी, आप ‘लक्ष्य’ के लिए प्रयास करें या न करें। इस कशमकश में आप का आधे से अधिक समय व्यर्थ ही नष्ट हो जाएगा। इस स्थिति में जिस मानसिक क्षमता का प्रयोग आप लक्ष्य की प्राप्ति करने के लिए करते, उसका उपयोग ‘कशमकश’ में हो जाता है। अंत में परिणाम शून्य ही निकलता है। इसके विपरीत आप स्पष्ट एवं सार्थक तस्‍वीर के साथ प्रयास करेंगे तो आप को सफलता अवश्य ही मिलेगी।

लक्ष्य प्राप्ति के लिए आपमें इच्छाशक्ति होनी चाहिए। आपमें इच्छाशक्ति नहीं तो आप कभी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते हैं। किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपमें ‘दृढ़ निश्चय’ होना चाहिए। ‘मैं’ इसे आवश्यक ही प्राप्त करके दिखाऊंगा। अक्सर देखा जाता है कि कुछ बच्चे पढ़ाई में कमजोर और किसी अन्य क्षेत्र जैसे खेल या ‘चित्रकला’ में प्रवीण होते हैं। इसका प्रमुख कारण यही है कि इस प्रकार के बच्चों में खेल या ‘चित्रकला’ के प्रति इच्छा है पर पढ़ाई के प्रति नहीं। ये बच्चे यदि पढ़ाई में भी खेल की तरह इच्छाशक्ति दिखाएं तो उन्हें पढ़ाई में भी अवश्य सफलता मिलेगी।

लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में आने वाली सभी शंकाओं को मस्तिष्क से निकाल देना चाहिए। विफलता जैसे नकारात्मक विचारों को भी मस्तिष्क से निकाल देना चाहिए। लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में विफलता के विषय में मत सोचो विफलता आपके मनोबल को तोड़ सकती है। मनोबल टूटने में आप अपनी पूरी क्षमता के साथ लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में अग्रसर नहीं हो पाएंगे। अपने मस्तिष्क से सभी प्रकार के नकारात्मक विचारों को निकाल फेंको। लक्ष्य के प्रति सदैव सजग रहो।

[राकेश कुमार शर्मा]

सफलता क्या है?

 

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