आओ, चिया उगाएं, बेहतरीन सेहत पाएं

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डा. बीएम डबराल चिया के पौधों के साथ।
  • बाजार में सुपरफूड चिया की है भारी मांग
  • प्रति किलो भाव 2 हजार रुपये किलो

जरा याद कीजिए कि प्राचीन काल में लंबे चौड़े एंथेस और स्पार्टा के योद्धाओं को। कहा जाता है कि इन योद्धाओं को महज एक चम्मच खुराक दी जाती थी और फिर ये दिन भर लड़ने के लिए मैदान में तैयार रहते थे। तो जो इन योद्धाओं को खुराक दी जाती थी, दरअसल वो चिया थी। मैक्सिको और ग्वाटेमाला का सुपरफूड चिया अब उत्तराखंड में भी उपलब्ध है। देहरादून के मोथरावाला में ओएनजीसी के वैज्ञानिक डा. बीएम डबराल ने चिया की सफल खेती की है। चिया पूरी तरह से आर्गनिक है और इसमें बाडी बिल्डिंग के सभी बिटामिन, प्रोटीन, न्यूट्रिशिन, ओमेगा तीन व छह होते हैं।

डा. डबराल का कहना है कि चिया की खेती उत्तराखंड में खरीफ सीजन में की जा सकती है। इसके लिए तापमान 12 से 45 डिग्री तक उपयुक्त है। यह मिंट फेमली का पौधा है इसलिए इसे मवेशी या वन्य जीव नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। चिया के बीजों में 30 प्रतिशत तक तेल होता है। बाजार में जैविक चिया के बीजों की भारी मांग है और अधिकांश कंपनियां सीधे खेतों से ही चिया की खरीद कर लेती हैं। भारत में मैसूर में यह खेती बहुतायत की जा रही है। बाजार में चिया 2000 रुपये प्रतिकिलो के भाव बिक रही है।

[वरिष्‍ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला की फेसबुक वॉल से]

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