आज है वर्ल्ड हीमोफीलिया डे, जानकारी ही है सही बचाव, जानें

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आज यानी 17 अप्रैल को वर्ल्ड हीमोफीलिया डे है. यह एक अनुवांशिक रोग है, जिसमें शरीर के बाहर बहता हुआ रक्त जमता नहीं होता. ऐसे में चोट लगने या दुर्घटना होने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि रक्त का बहना बंद नहीं होता. हीमोफीलिया दो प्रकार का होता है – हीमोफीलिया ए और हीमोफीलिया बी. महिलाओं में इस बीमारी से ग्रस्त होने का खतरा बहुत कम होता है और पुरुष इससे अधिक ग्रस्त होते हैं. इसके पीछे भी अनुवांशिक वजह हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, हीमोफीलिया के कारण एक रक्त प्रोटीन की कमी होती है जिसे क्लाॅटिंग फैक्टर कहा जाता है. इस फैक्टर की खासितय यह है कि यह बहते हुए रक्त के थक्के जमाकर उसका बहना रोकता है. जब इस बीमारी से कोई व्यक्ति ग्रस्त होता है तो थ्राम्बोप्लास्टिक नामक पदार्थ की कमी से होती है. थ्राम्बोप्लास्टिक में खून का थक्का जमाने करने की क्षमता होती है.

हीमोफीलिया के इलाज के लिए चिकित्सीय प्रौद्योगिकी में सुधार के बावजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खून की इस गंभीर बीमारी से पीड़ित करीब 80 प्रतिशत भारतीय लोगों में इसका पता ही नहीं चलता क्योंकि दूर.दराज के इलाकों में सही निदान की सुविधाओं का अभाव है.

इस बीमारी से बचने के ये हैं तरीके :

एस्परिन या नाॅन स्टेराॅयड दवा लेने से आप यथा संभव बचें.
आप हेपेटाइटिस बी का वैक्सिन जरूर लगवा लें.
इससे पीड़ित व्यक्ति कहीं भी जानें पर ब्लीडिंग या डैमेज होने पर इससे बचने का उपाय करके चलें.
हीमोफीलिया से पीड़िता महिला के बच्चों के बारे में यह पता चलता है कि वह इससे ग्रस्त है तो उसकी अत्यधिक देखभाल करें.
हीमोफीलिया से पीड़ित व्यक्ति इसके संबंध में जानकारी व नये शोध से अपडेट होते रहंे.

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