प्रशांत किशोर जदयू की चुनावी राजनीति में नेपथ्य में हैं या हाशिये पर?

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पटना : जनता दल यूनाइटेड के भविष्य माने जाने वाले प्रशांत किशोर आजकल शांत है. चुनावी मौसम में उनकी राजनीतिक सक्रियता वैसी नहीं दिख रही है, जैसी उम्मीद की जा रही थी. उन्होंने हाल-फिलहाल में बस गांधी जी का कोट ट्वीट किया. जब नीतीश कुमार ने कई वरिष्ठों की मौजूदगी के बीच 41 साल के एक लड़के को अपने बाद सीधे नंबर दो का ओहदा दे दिया तो सब भौंचक रह गये थे. वह शख्स जिसको राजनीतिक प्रबंधन का अनुभव जरूर था, लेकिन राजनीति का कोई सक्रिय अनुभव नहीं था, उसे नीतीश कुमार ने उपाध्यक्ष बना दिया था.

नीतीश के उस फैसले से पार्टी के बहुत सारे नेता तब मन मसोस कर रह गये हालांकि वे नीतीश के बाद पीके के मातहत काम करने को लेकर असहज दिख रहे थे. हाल में जब प्रशांत किशोर ने दो बयान दिया तो उन नेताओं को अपनी ही पार्टी के नंबर दो पर हमला करने का मौका मिल गया. पार्टी में नीतीश के प्रति पूर्ण आस्थावान लोगों को प्रशांत किशोर की वह बात खल गयी कि हम तो पीएम-सीएम बनाने में सहयोग करते हैं, तो किसी को एमपी-एमएलए भी बना सकते हैं. पीके ने एक सवाल नीतीश के महागठबंधन से अलग होने के तरीके पर उठाया और कहा उससे वे सहमत नहीं हैं, इसके लिए पुनः जनादेश हासिल करना चाहिए था.

इसके बाद प्रशांत किशोर खामोश हैं और पार्टी के दूसरे नेता उत्साह के साथ चुनावी तैयारियों में जुट गये हैं. आज जनता दल यूनाइटेड के कार्यालय में जब एनडीए के नेता सीट बंटवारे का एलान करने आये तो प्रशांत किशोर नहीं दिखे. हालांकि यह सहयोगी दलों के प्रदेश अध्यक्षों की प्रेस कान्फ्रेंस थी, जिसमें तीनों दलों जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय व लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस शामिल थे, पर इस दौरान मंच पर जदयू के तेज-तर्रार नेता व पूर्व नौकरशाह आरसीपी सिंह भी मौजूद थे.

आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के बेहद विश्वस्त हैं और राज्यसभा में पार्टी की अगुआई करते हैं. बहुत सारे लोग आरसीपी को जदयू का भविष्य का नेता भी मानते हैं. आरसीपी सिंह ने ही प्रशांत किशोर के बड़बोले बयान के बाद उन पर विनम्र लहजे में ही सही प्रतिवार किया था.

लंबे अरसे से यह भी चर्चा चल रही थी कि नीतीश कुमार प्रशांत किशोर को उनके गृहक्षेत्र बक्सर से चुनाव लड़ा सकते हैं, लेकिन आज हुए सीट बंटवारे में बीजेपी की यह सीटिंग सीट उसके पास ही रही. ऐसे में पीके के इस सीट से लड़ने की संभावना भी खत्म हो गयी है.

ऐसे में आने वाले सप्ताह में यह देखना होगा कि प्रशांत किशोर की भविष्य की राह क्या होगी. फिलहाल तो मीडिया रिपोर्टाें में यही कहा जा रहा है कि चुनाव से पहले ही जदयू नेतृत्व उनका पर कतरने की तैयारी में है.

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