सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं के प्रवेश के बाद किया गया ‘शुद्धीकरण’

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दो महिलाओं के सबरीमाला में प्रवेश करने के बाद विरोध प्रदर्शन करतीं भाजपा की महिला कार्यकर्ता. फोटो : एएनआइ.

तिरुवनंतपुरम : केरल के सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में 50 साल की दो महिलाओं के प्रवेश करने के बाद उसका शुद्धीकरण किया गया. केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने भी इस बात की पुष्टि की है कि मंदिर में 50 साल से कम उम्र की दो महिलाएं प्रवेश कीं. न्यूज एजेंसी एएनआइ के अनुसार, बुधवार सुबह  40 वर्ष उम्र की दो महिलाएं बिंदु और कनकदुर्गा सुबह पौने चार बजे के लगभग सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर गयीं और वहां पूजा -अर्चना की. इसके बाद मंदिर का शुद्धीकरण किया गया और उसे पुनः खोला गया.

बिंदु एक वकील हैं और कनकदुर्गा एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं. सितंबर 2018 के आखिरी दिनों में सुप्रीम कोर्ट ने दशकों पुरानी परंपरा को खारिज करते हुए सभी आयुवर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दी और केरल सरकार को इस आदेश का पालन करने का निर्देश दिया. केरल की वाम सरकार ने बार-बार यह संकल्प दोहराया कि मंदिर में वह सभी आयुवर्ग की महिलाओं का प्रवेश सुनिश्चित करेगी, लेकिन भारी विरोध के कारण ऐसा हो नहीं सका. केरल में भाजपा एवं कांग्रेस जैसी पार्टी भी मंदिर में रजस्वला महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रही है. परंपरागत रूप से 10 साल से 50 साल उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है.

 

इससे पहले दोनों ने 18 दिसंबर को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी लेकिन भारी विरोध के चलते कामयाब नहीं हो पायी थी. दोनों के प्रवेश करने का वीडियो भी सामने आया है.

प्रधानमंत्री ने अपने इंटरव्यू में सबलीमाला पर क्या कहा है?

मंगलवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज एजेंसी एएनआइ को साक्षात्कार दिया था. इस दौरान जब उनसे सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि सबरीमाला ही नहीं देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां पर परंपरा के मुताबिक पुरुषों की इंट्री प्रतिबंधित है. वहां इसका पालन किया जाता है. इस पर किसी को समस्या नहीं होती है. अगर लोगों की आस्था है कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश न हो तो उसका भी ख्याल रखा जाना चाहिए. मोदी ने यह भी कहा कि महिला जज ने सबरीमाला मामले पर जो फैसला दिया है, उसे भी देखा जाना चाहिए.

बता दें कि इससे पहले 24 दिसंबर के आसपास भी सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा के दर्शन की चाह रखने वाली तमिलनाडु की 11 महिलाओं के एक समूह को प्रदर्शनकारियों के हिंसक होने पर यात्रा को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था. इस दौरान पुलिस ने दो दर्जन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था. महिलाओं के इस समूह का नेतृत्व साल्वी कर रही थीं, जिनका संबंध तमिलनाडु के मनिति महिला समूह से है. भक्तों द्वारा पहाड़ी पर चढ़ने से उन्हें रोकने और भगाने पर इन महिलाओं को पंबा से मदुरै के लिए वापस जाने को बाध्य होना पड़ा.

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बीते 28 सितंबर को हर आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने का फैसला किए जाने के बाद से सबरीमाला में हिंदू समूहों द्वारा लगातार इस फैसले के खिलाफ विरोध.प्रदर्शन किया जा रहा है. उनका कहना है कि यह फैसला धार्मिक परंपरा के खिलाफ है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में क्या कहा था?

28 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि हर उम्र वर्ग की महिलाएं अब मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी. हमारी संस्कृति में महिला का स्थान आदरणीय है. यहां महिलाओं को देवी की तरह पूजा जाता है और मंदिर में प्रवेश से रोका जा रहा है, यह स्वीकार्य नहीं है.

गौरतलब है कि 800 साल पुरानी इस प्रथा पर देश की शीर्ष अदालत ने अपना सुप्रीम फैसला सुनाते हुए नारियों को सबरीमाला मंदिर में जाने की इजाजत दे दी थी. अब सबरीमाला मंदिर में महिलाएं भी भगवान अयप्‍पा के दर्शन कर सकती हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने को लेकर विरोध हो रहा था. केरल की पिनरई विजयन सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमल में लाने को बाध्य थी तो दूसरी ओर उसे विरोध का भी सामना करना पड़ रहा था. आखिरकार दो जनवरी को दो महिलाएं मंदिर में प्रवेश पाने में कामयाब हो ही गयीं.

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