‘हम हैं असली रालोसपा, उपेंद्र कुशवाहा के पास सपोर्ट नहीं है, NDA ही करेगा बिहार का विकास’

0
73
चेनारी से विधायक ललन पासवान (फाइल फोटो)।

चेनारी से रालोसपा विधायक ललन पासवान आजकल कई जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा बिहार में बंट गई है। ललन पासवान के नेतृत्व में उस गुट ने खुद को असली रालोसपा कहा है।  वे एक साथ अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महासचिव भी हैं। इस संबंध में उन्होंने चुनाव आयोग के पास एक आवेदन भी दिया है। साथ ही वे बिहार से एनडीए के तहत दो लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात भी कह रहे हैं। उनसे इन्हीं मसलों पर हमारे संवाददाता रत्नसेन भारती ने बातचीत की है।

मोदी-शाह युग में भाजपा का आज से पहला ‘महासंगम’, हर लोकसभा सीट पर पार्टी करेगी मंत्रणा

प्रश्न : आपको रालोसपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। आखिर उपेंद्र कुशवाहा से अलग होने का फैसला क्यों लेना पड़ा आपको ?
उत्तरः बाल्मीकिनगर में जो पार्टी का खुला अधिवेशन हुआ था, उसमें सभी की राय थी कि एनडीए के साथ ही रहना है। उसमें महागठबंधन में जाने पर सहमति नहीं थी। बेहद कम लोग थे, जो उपेंद्र कुशवाहा का समर्थन कर रहे थे। बस, केवल उनको ही जाने की जल्दी थी। इसलिए जब उन्होंने एनडीए से नाता तोड़ा तो पार्टी में इसका विरोध हुआ। चूंकि, कार्यकर्ताओं का बहुमत एनडीए के साथ रहने के पक्ष में था, इसलिए हमने अपनी राह अलग कर ली।

प्रश्न : आप का दावा है कि असली रालोसपा आपके साथ है। चुनाव आयोग ने कोई फैसला दिया है या नहीं।
उत्तर : हमने चुनाव आयोग के पास अपना पक्ष भेज दिया है। हमने जो दावा किया है, उसके पक्ष में सुबूत आयोग के पास भेज दिया है। वहां से कहा गया है कि आपको प15 दिन के बाद इसमें अपना पक्ष रखने के लिये बुलाया जाएगा। पार्टी के सभी विधायक हमारे साथ हैं। कार्यकर्ताओँ का बहुमत हमारे साथ है। हमारे एक विधायक हैं, जो न तो अभी उपेंद्र कुशवाहा जी का सपोर्ट कर रहे हैं और न हमारा। हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि वे हमारे साथ आएं और बिहार के विकास के लिये काम करें।

प्रश्न : आपने वाल्मीकिनगर अधिवेशन में शिरकत की थी या नहीं। यदि आप उपेंद्र कुशवाहा से अलग विचार रखते हैं तो वहां अपनी बात कहते तो बेहतर रहता।
उत्तर : मुझे पता था कि वे किस एजेंडे के तहत वहां अधिवेशन कर रहे हैं। जब वे बिहार के विनाश के लिए राजनीति करने लगे थे तो मुझे अलग राह चुनने के लिए विवश होना पड़ा। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पार्टी के जितने भी विधायक हैं, उनमें से किसी ने भी उस अधिवेशन में भाग नहीं लिया था।

प्रश्न : आपका एजेंडा किस तरह से उपेंद्र से अलग है, जिससे राज्य का विकास हो सकेगा ?
उत्तर : हमे इसके लिए कोई नया एजेंडा सेट करने की जरुरत नहीं है। फिलहाल, तो पीएम मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के रास्ते पर चल कर ही अबतक बिहार का विकास हुआ है और आगे भी होता रहेगा। पिछले 50 साल में कांग्रेस ने आखिर क्या किया था। उसके बाद लालू का 15 साल का राज जंगलराज था। जिसमें बिहार पिछड़े राज्यों की सूची में आ गया। तब बिहार में चहुंओर विनाश का आलम था। स्कूल, स्वास्थ्य, सड़क और कानून-व्यवस्था एकदम से लचर थी। आज देखिए कि पहाड़ों पर भी बिजली है। आदिवासी से लेकर समाज का हर वर्ग खुश है, क्योंकि उसके पास विकास की रोशनी पहुंची है। नीतीश सरकार लगातार अच्छा काम कर रही है। आखिर, यही तो विकास है, जो यहां दिखता है।

प्रश्न : आनेवाले लोकसभा चुनाव में आपकी क्या रणनीति है। क्या आप की पार्टी एनडीए के तहत चुनाव लड़ेगी ?
उत्तर : हमने अपनी मांगों से एनडीए को अवगत करा दिया है। हमारी कोशिश है कि बिहार में कम से कम दो लोकसभा सीटों से लड़ें। अभी सीटों का खुलासा करना उचित नहीं होगा। पर, इतना तय है कि लोकसभा चुनाव के लिए हमारे पास अपनी रणनीति है और हम उस पर काम कर रहे हैं।

प्रश्न : हाल के दिनों में विपक्ष यह लगातार आरोप लगा रहा है कि नीतीश राज में कानून-व्यवस्था खराब है। रोज हत्याएं हो रही हैं।
उत्तर : देखिए, पूरी तरह से आदर्श स्थिति तो कहीं होती नहीं है। देश के किसी भी राज्य में आप देख लें कि हत्या हो रही है या नहीं। इसके पीछे बहुत सारे कारण हैं। आजकल जो छिटपुट अपराध हो रहे हैं, वे निजी दुश्मनी के चलते हो रहे हैं। संगठित अपराध नहीं हो रहा है। जो भी गैंग्स या उनके संचालक थे, वे या तो मुठभेड़ में मारे जाते हैं या फिर जेल के भीतर हैं। जो यहां नहीं हैं वे राज्य छोड़कर भाग चुके हैं। आजकल शंकरबिगहा, बेलछी और बिहटा में जैसे नरसंहार लालू राज में होते थे। कांग्रेस राज में भी यही आलम था। अब वह सब नहीं है। हम छोटी घटनाओं में बड़े कारण नहीं ढूंढ़ सकते हैं। दूसरी ओर, इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन लगातार काम कर रहा है।

प्रश्न : दलित और महादलित राजनीति का बिहार में अभी क्या स्थान है। इसकी राजनीति में आप कहां हैं ?
उत्तर : देखिए, हम इस चक्कर में नहीं हैं कि मुझे बतौर दलित नेता स्थापित करना है। मैं बस आमलोगों के लिए काम कर रहा हूं। उनके हक के लिए संसद से लेकर सड़क तक काम करना चाहता हूं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here