मोदी – शाह युग में लगातार हाशिये में जाते रहे शहनवाज हुसैन

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वक्त का फेर क्या होता है. यह कोई शहनवाज हुसैन से पूछे. कभी भाजपा की राजनीति में दबदबा रखने वाले शहनवाज हुसैन एक अदद सीट के लिए तरस रहे हैं. वाजपेयी के जमाने में सबसे कम उम्र में मंत्री का रिकार्ड बनाने वाले शहनवाज अकसर टीवी चैनलों में बीजेपी का पक्ष रखते दिख जाते हैं. शहनवाज को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही है. खबर यह है कि उन्हें अररिया से भी टिकट दिया जा सकता है लेकिन अभी तक इस बात को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है.

शहनवाज पार्टी का अल्पसंख्यक चेहरा हैं. उस दौर से लेकर आजतक शहनवाज और मुख्तार अब्बास नकवी दो ऐसे नेता हुए जिन्होंने बीजेपी का दामन कभी नहीं छोड़ा. इस दौरान कई ऐसे मौके आये जब एक अल्पसंख्यक रहते हुए बीजेपी में रहना सहज नहीं था. 13 वीं लोकसभा में पहली बार सांसद चुनकर आये तो वाजपेयी सरकार ने कम उम्र में ही उनको जगह दी. 2001 में कोयला मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार मिला. फिर 2001 में सिविल एवियशन मिनिस्टर बने. उस वक्त सबसे कम उम्र में कैबिनेट मंत्री बनने का यह रिकार्ड था.

भागलपुर सीट से हारने के बाद उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब भागलपुर से भी टिकट नहीं मिला तो उनके समर्थकों की निगाह अररिया सीट पर टिकी हुई है.

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