प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फुले के संघर्ष को जानिए, मिलेगी प्रेरणा

0
55

 

पुणे : आज देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले की जयंती है. सावित्री बाई फुले महिला शिक्षा व समानता की समर्थक थीं और महान समाज सुधारक थीं. वे कवयित्री भी थीं. सावित्री बाई फुले महान समाज सुधारक ज्योतिराव फुले से हुआ था. उनके जन्मदिन पर आज वे ट्विटर पर टाॅप ट्रेंड में बनी हुई हैं और लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.

सावित्री बाई फुले का जन्म तीन जनवरी तीन जनवरी 1831 में महाराष्ट्र के नयागांव में हुआ था और मात्र नौ साल की उम्र में उनका विवाह 1840 में ज्योतिराव फुले से हो गया. उस समय बाल विवाह का प्रचलन था. विवाह के समय ज्योतिराव फुले की उम्र 13 वर्ष थी.

उन्होंने अपने पति के साथ समाज सुधार व शिक्षा के लिए बडा काम किया. 1848 में उन्होंने अपने पति के साथ पुणे में विभिन्न वर्ग की नौ छात्राओं को लेकर स्कूल खोला. 1852 में उन्होंने अछूत बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की. वे इसकी प्रिंसिपल बनीं. उन्होंने देश के पहले किसान विद्यालय की भी स्थापना की. फुले दंपती ने बाद में कई स्कूलों की स्थापना की.

सावित्री बाई फुले जब स्कूल में पढाने जाती थीं तो लोग विरोध स्वरूप उनपर गंदगी, कीचड, गोबर व विष्ठा तक फेंकते थे. इसलिए वे अपने साथ एक झोली में अपना एक जोडी वस्त्र लेकर चला करती थीं और स्कूल पहुंचने पर उसे बदल लिया करती थीं, लेकिन उन्होंने महिला शिक्षा व अछूत बालिकाओं की शिक्षा नहीं रोकी. उनके योगदान को देखते हुए 1998 में भारत सरकार ने उनके नाम पर टिकट जारी किया और फिर 2014 में उनके नाम पर पुणे विश्वविद्यालय का नाम किया गया.

10 मार्च 1857 को प्लेग के कारण सावित्री बाई फुले का निधन हो गया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here