मसूद अजहर प्रकरण : अब संघ परिवार का मोदी सरकार पर दबाव, चीन के खिलाफ उठाओ कदम

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अश्विनी महाजन एवं नरेंद्र मोदी का फाइल फोटो.

व्यापार-वाणिज्य के तरजीही राष्ट्र का दर्जा चीन से वापस लिया जाये
चीन के उत्पादों का हर भारतीय करे बहिष्कार

नयी दिल्ली : चीन ने जिस तरह पुलवामा के घृणित हमले के बावजूद उसके दोषी जैश-ए-मोहम्मद चीफ मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र संघ में बचाया है, उससे भारत के अंदर काफी गुस्सा है. यह गुस्सा अलग-अलग ढंग से लोग प्रकट कर रहे हैं. अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की आर्थिक इकाई स्वदेशी जागरण मंच ने भी नरेंद्र मोदी सरकार पर चीन के खिलाफ ठोस आर्थिक कदम उठाने के लिए दबाव बना दिया है. स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि सरकार चीन को व्यापार-वाणिज्य के लिए दिए गये मोस्ट फेवर नेशन का दर्जा वापस ले ले.

स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि चीन के उत्पादों पर अधिक कर लगाना चाहिए. स्वदेशी जागरण मंच ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है और कहा है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद जिस तरह के कदम पाकिस्तान के लिए उठाये गये उसी तरह के कदम चीन के लिए उठाये जायें. मालूम हो कि पुलवामा में अपने 40 सीआरपीएफ जवानों को गंवाने के बाद भारत ने पाकिस्तान का मोस्ट फेवर नेशन का दर्जा वापस ले लिया था और उसके उत्पाद पर दोगुणा टैक्स लगा दिया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह पत्र स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन ने लिखा है. उन्होंने लिखा है कि चीन के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर अब कड़े कदम उठाना आवश्यक है. अश्विनी महाजन ने पत्र में लिखा है कि चीन इस वक्त खुद आर्थिक दबाव में है. उसके व्यापार रिश्ते अमेरिका सहित दूसरे देशों से बिगड़े हैं. ऐसे में भारत के द्वारा उसके साथ कारोबारी रिश्ते पर लिये जाने वाले एक्शन से उसे यह समझ में आएगा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई क्यों आवश्यक है और इससे भारत की आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई भी अधिक मजबूत होगी.

उधर, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी चीन की वस्तुओं के बहिष्कार की अपील की है. आरएसएस ने कहा है कि नेहरू जी के कारण चीन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बन गया और भारत उससे बाहर रह गया. संघ ने अपील की है कि सभी भारतीयों को चीन के उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि 13 मार्च को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ने एक बार फिर सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य की हैसियत का प्रयोग करते हुए जैश चीफ मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव को वीटो कर दिया. यह प्रस्ताव सुरक्षा परिषद के तीन स्थायी सदस्यों अमेरिका, फ्रांस व इंग्लैंड ने संयुक्त रूप से लाया था. चीन के इस फैसले के बाद दुनिया भर में उसकी आलोचना हो रही है और आतंकवाद को लेकर उसके स्टैंड पर सवाल उठाया जा रहा है.

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