राधाकृष्ण दमानी : खामोशी से काम करने वाला काॅलेज ड्राप आउट शख्स जिसकी सफलता शोर मचाती है

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राधाकृष्णन दमानी.

राधाकृष्ण दमानी को दो चीजें से बहुत प्यार है – इन्वेस्टमेंट,  रिटेल कारोबार

हर्षद मेहता व केतन पारेख  के बबल मार्केट में उन्होंने खुद के लिए मौके तलाशे

हालांकि शेयर बाजार में उनके निवेश का मुख्य दर्शन क्वाइलिटी इन्वेस्टमेंट ही है

वे धीरे लेकिन दूर तक चलने में यकीन रखते हैं. वे कम बोलते हैं और ज्यादा सुनते हैं. वे अपने काम को अपनी उपलब्धियों के माध्यम से बताते हैं, उस पर जुबानी फिजुलखर्जी नही ंकरते. उन्होंने 32 साल की उम्र में न चाहते हुए भी स्टाॅक मार्केट में भाई की सलाह पर कदम रखा था, लेकिन मुनाफे के ऐसे मास्टर बने की सबकी आंखें चौंधिया गयीं. उन्होंने मात्र 15 साल में एक स्टोर से भारत में रिटेल चेन का सबसे उभरता हुआ ब्रांड स्थापित कर दिया. जी हां, यह कहानी है डी मार्ट ब्रांड के मालिक राधाकृष्ण दमानी (Radhakishan Damani) की.

62 साल के दमानी को अपने तीन दशक पुराने स्टाॅक मार्केट कैरियर में सफेद कमीज से उन्हें विशेष लगाव रहा है. यह उनके व्यक्तित्व की सादगी भी दिखाता है. उनके सफेद शर्ट की वजह से बाजार में लोग उन्हें मिस्टर व्हाइट या व्हाइट कह कर भी पुकारते हैं. दमानी धीरे पर दूर तक चलने में यकीन करते हैं और दूसरे बड़े इन्वेस्टर की तरह उनकी टीवी चैनलों या मीडिया से ज्यादा लगाव नहीं है. वे कैमरे व खबरों से बचते हैं.

Forbes मैगजीन के अनुसार, राधाकृष्ण दमानी की मौजूदा संपत्ति 11.30 बिलियन डाॅलर की है. वे भारत के 11वें सबसे धनी शख्स हैं.

राधाकृष्ण दमानी ने 2002 में मुंबई सब अर्बन में अपना पहला रिटेल स्टोर खोला, जिसमें एक ही छत के नीचे ग्राहकों का दैनिक जीवन के काम की हर चीज मिल जाती है. उन्होंने 2005 में डीमार्ट ब्रांड स्थापित किया. अपने इस प्रयोग से पहले उन्होंने अपना बाजार की फ्रेंचाइजी ली थी जिससे काफी कुछ सीखा. प्रतिस्पद्र्धी बाजार में दमानी के स्टोर में चीजें अधिक से अधिक सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की शुरुआत हुई और कम मुनाफे की थ्योरी पर ज्यादा सेल के सिद्धांत को अपनाया गया. महाराष्ट्र में उनका यह प्रयोग चल निकला. उनके रिटेल चैन का ब्रांड नाम डी मार्ट जिसका स्वामीत्व एवेन्यू सुपमार्ट नामक कंपनी के पास है. अब इसकी एवेन्यू इ काॅमर्स लिमिटेड, एवेन्यू फूड प्लाजा प्राइवेट लिमिटेड जैसी सब्सिडरी कंपनियां भी सक्रिय हैं.

15 साल बाद 2017 में दमानी इस ब्रांड का आइपीओ लेकर आये. यह आइपीओ 2017 का सुपरस्टार साबित हुआ. लिस्टिंग के दो दिन के अंदर इसकी कीमत दोगुणी हो गयी और आज दो साल के अंतराल पर इसकी कीमत चार गुणी है. यह आइपीओ एक उदाहरण सेट कर गया. आज उनकी कंपनी का शेयर 1500 रुपये मूल्य छूने की ओर बढ रहा है. डी मार्ट के आज देश के नौ राज्यों में 164 स्टोर हैं.

राधाकृष्ण दमानी अंतर्मुखी हैं. उन्हें शुरुआती दिनों में शेयर बाजार की समझ नहीं थी तो उन्हें इसे चंद्रकांत संपत नामक जमे जमाये निवेशक से सीखा-जाना. कहते हैं कि शुरुआती दिनों में वे उधार पर पैसे लेकर भी बाजार में भाग्य आजमाया करते थे. वे शेयर बाजार में आने से पहले बाॅल-बेरिंग का छोटा-सा कारोबार करते थे. वे शुरुआती दिनों से ही लंबी रणनीति पर काम करते हैं और छोटे फायदे में नहीं उलझते हैं. दमानी का एक रिसार्ट भी है और आधा दर्जन से अधिक कंपनियों में उनकी अच्छी एक प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है.

Forbes ने उनके वेल्थ का सोर्स इस प्रकार लिखा है – इन्वेस्टमेंट, रिटेल, सेल्फ मेड. यानी वे स्वयं निर्मित शख्स हैं, जिन्होंने अपने लिए खुद पैसे बनाये. उन्होंने शुरुआती दिनों में इन्वेस्टमेंट के जरिये पैसा कमाया और फिर रिटेल सेक्टर में कूदे जिसमें उन्हें बढते उपभोक्ता बाजार के कारण भविष्य नजर आया.

राधाकृष्ण दमानी ने बंबई यूनिवर्सिटी से काॅमर्स की पढाई करनी चाही थी, लेकिन इसे पूरा नहीं कर सके. First इयर का एग्जाम देने के बाद वे काॅलेज से ड्राप आउट हो गये. वे ज्यादा पढे-लिखे नहीं हैं, लेकिन उन्होंने काम करते हुए काफी कुछ सीखा. उनकी कंपनी में उनकी पत्नी व भाई गोपीकिशन दमानी की बड़ी हिस्सेदारी है. उनकी तीन बेटियां हैं, जिसमें एक मंजरी चंडक डायरेक्टर के रूप में एवेन्यू सुपरमार्ट का काम देखती हैं.


डी मार्ट का एक स्टोर.

दमानी की इन्वेस्टमेंट के जरिये कमाई की थ्योरी क्या थी?

राधाकृष्ण दमानी ने शेयर मार्केट में शाॅट सेलिंग के जरिये पैसे बनाये. शाॅट सेलिंग के तहत किसी स्टाॅक की कीमत जब गिरती है तब फायदा होता है. हर्षद मेहता ने जब कुछ कंपनियों के शेयर को मेनुपुलेट किया था. उसने बैंक के पैसे से कुछ शेयरों में जोरदार खरीदारी कर उसकी कीमत बहुच उंचाई पर पहुंचा दिया था. एससीसी जैसी कंपनी के शेयर हर्षद ने कुछ ही महीनों में 200 रुपये से नौ हजार रुपये पर पहुंचा दिया था. यह सब देख कर राधाकृष्ण दमानी समझ गये कि हर्षद मेहता जिन स्टाॅक को मेनुपुलेट कर रहा है, उनका फंडामेंटल उनके हाइवैल्यू को कायम नही रख सकेंगे और वह गिर जायेगा. ऐसे में राधाकृष्ण दमानी ने उन स्टाॅक में शाॅट सेलिंग की. 2000-01 में जब केतन पारेख ने फिर एक बार ऐसा किया तो दमानी ने उसके खरीदे स्टाॅक में शाॅट सेलिंग शुरू की.

बाद के दिनों में राधाकृष्ण दमानी ने वैल्यू इन्वेस्टिंग पर जोर दिया. इसके तहत कोई क्वाइलिटी स्टाॅक जब काफी कम कीमत पर उपलब्ध होता है तो वे उसमें इन्वेस्ट कर पेसेंस के साथ कीमत बढने का इंतजार करते हैं.

डीमार्ट में चीजें सस्ती क्यों?

राधाकृष्ण दमानी लांग टर्म की सोचते हैं. 2000-01 में जब प्रापर्टी की कीमत काफी कम हो गयी थी, तब उन्होंने अलग-अलग लोकेशन में डी मार्ट के लिए प्रोपर्टी खरीदी. उस वक्त ये ऐसे इलाके थे जहां बसावट नहीं थी और जिन्हें अभी डेवलप होना बाकी था. यह तय था कि वे डेवलप एरिया होंगे. बाद में उन्होंने उसमें स्टोर खोले. उनका कोई स्टोर माॅल में नहीं है. उनके अधिकतर स्टोर अपनी प्रोपटी पर है. इस कारण उनका आॅपरेशनल कास्ट काम हो जाता है. इसी कारण वे दूसरे रिटेल चेन की तुलना में सस्ती दरों पर लोगों को चीजें बेच सकते हैं.

दमानी खुद का अरबों का कारोबार आज भले संचालित करते हों, लेकिन वे आज भी एक इन्वेस्टर हैं. वे आज भी नियमित रूप से इन्वेस्टमेंट करते हैं और अपना अच्छा-खासा समय उसमें लगाते हैं. वे कहते हैं कि उन्होंने इनवेस्टमेंट से जीवन में काफी कुछ सीखा है.

भारत के चर्चित इन्वेस्टर राकेश झुनझुनवाला कहते हैं कि अगर उनके पिताजी व राधाकृष्ण दमानी मुझे गाइड नहीं करते तो मैं इतना सफल नहीं हो पाता. दमानी जनकल्याण के लिए पैसे दान करते हैं, लेकिन अपने नाम को कभी सामने नहीं आने देते.

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