कहीं महागठबंधन के अंतरकलह में डूब न जाये गोड्डा सीट

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होली के बाद रांची में महागठबंधन के सीटों का एलान होगा. सर्वाधिक पेंच गोड्डा सीट पर फंसा हुआ है. जहां से झाविमो के प्रदीप यादव दावेदारी ठोक रहे हैं. फुरकान अंसारी टिकट के लिए खुद बढ़ चढ़कर मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनके बेटे इरफान अंसारी जो खुद कांग्रेस विधायक हैं. दिल्ली में एडी – चोटी करने में लगे हुए हैं.

इरफान ने कहा कि प्रदीप यादव को एमपी बनने का शौक है, तो कांग्रेस आलाकमान उनको राज्यसभा भेजे. गोड्डा पर रार खत्म करना होगा. प्रदीप यादव झारखंड विकास मोर्चा में नंबर दो की हैसियत रखते हैं. इसलिए वह पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि सीट उनके पास जाये.

देखना यह है कि यह सीटे किसके पास जाती है. अगर प्रदीप यादव को टिकट दिया गया तो कांग्रेस नेता फुरकान अंसारी भीतरघात कर सकते हैं. इस परिस्थिति में प्रदीप यादव के लिए इस चुनौती से निपटना आसान नहीं होगा. गोड्डा लोकसभा सीट पर हुए पिछले 7 चुनाव में बीजेपी ने 6 बार जीत दर्ज की है. गोड्डा लोकसभा सीट पर पिछड़ी जातियों और मुस्लिमों का दबदबा है.

कैसा रही है प्रदीप यादव की कार्यशैली
प्रदीप यादव की राजनीतिक शैली को लेकर उनके करीब से जानने वाले लोग कई तरह की बाते करते हैं. झारखंड अलग होने के बाद से ही वह राजनीति में प्रासंगिक हैं. पहले भाजपा में फिर झाविमो में बाबूलाल मरांडी के विश्वस्त हैं. लेकिन कहा जाता है कि झारखंड विकास मोर्चा में अगर कोई नेता टिकता नहीं है तो इसकी बड़ी वजह प्रदीप यादव की कार्यशैली है.

वह पार्टी में बाबूलाल के करीब किसी को आने नहीं देना चाहते हैं. ध्यान रहे झारखंड विकास मोर्चा से जीतकर कई विधायक और सांसद भी बने लेकिन कोई ज्यादा लंबे दिन तक रह नहीं पाया. ऐसे में झारखंड विकास मोर्चा की छवि एक ऐसी पार्टी की बन गयी है जो जीत का प्लेटफार्म तो बन सकता है लेकिन भविष्य की राजनीति के लिए फिट नहीं बैठता है.

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