पाकिस्तान में आतंकवाद का जड़ कैसे गहराता गया ?

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भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. पाक में आतंक की जड़े काफी गहरी है और इसकी शुरुआत 1980 के करीब हुई. पाकिस्तान में सिर्फ जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा जैसे संगठन नहीं है जो आतंकवाद फैलाते हैं. आतकी संगठनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. जो भारत विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देती हैं. भारत और पाकिस्तान के अलग हुए 70 साल हो गये लेकिन इन 70 सालों में दोनों देश अलग – अलग मुकाम पर पहुंच चुका है. आतंक की शरणस्थली के रूप में मशहूर पाकिस्तान की बुनियाद ही धार्मिक देश के रूप में रखी गयी थी. इसलिए कट्टरता ने तेजी से पांव पसारा.

पाकिस्तान मोहम्मद अली जिन्ना के दिमाग की उपज थी लेकिन अलग होने के बाद पाकिस्तान में वह ज्यादा दिनों तक शासन नहीं कर पाये. टीबी की बीमारी की वजह से उनके असमायिक मौत हो गयी. फिर पाकिस्तान दिशाहीन हो गया.
पाकिस्तान ने शुरू से ही तरक्की के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया है. पाकिस्तान में आतंकवाद के फलने – फूलने की बड़ी वजह वहां की सेना है, जिसने हमेशा से लोकतंत्र का गला घोंटने का काम किया है.

वहां के मदरसों में सऊदी द्वारा पैसे की फंडिग की जाती है. यह फंडिग की वजह से वह वहाबी समुदाय की विचार को बल मिलता है. पाकिस्तान के साथ दूसरी समस्या अफगानिस्तान बार्डर का है. तालिबान से भारी मात्रा में आतंकवादी पाकिस्तान में प्रवेश करते हैं. ये आतंकवादी संगठन भारत के खिलाफ भड़काने का काम करते हैं. इनको फंडिग खाड़ी देशों से मिलती है.

वहाबी का फैलाव
1980 तक पाकिस्तान में ज्यादा आतंकी गतिविधियां नहीं होती थी लेकिन वहाबी समुदाय के बढ़ते प्रभाव के चलते यह दूसरे समुदायों को निशाना बनाने लगा. पाकिस्तान भारत से कश्मीर आतंक के जरिये हासिल करना चाहता है. पाकिस्तानी सेना इसके लिए आतंकियों को ट्रेनिंग देती है और भारत के खिलाफ इस्तेमाल करती है.

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