पाकिस्तान को महंगी पड़ रही है चीन से दोस्ती, IMF कर्ज देने में कर रहा है देरी

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photo source: ANI

चीन से दोस्ती की वजह से पाकिस्तान को नयी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है. आर्थिक संकट में फंस चुके पाकिस्तान को अंतरर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) से कर्ज मिलने में देरी हो सकता है. आइएमएफ ने पाकिस्तान को स्पष्ट कर दिया है कि वह जो साहयता पाकिस्तान को देगा, उससे पहले इस्लामाबाद से इस बात की लिखित गांरंटी चाहिए कि इस पैसे का उपयोग चीन का कर्ज चुकाने के लिए नहीं किया जायेगा.

बता दें कि चीन पाकिस्तान में सीपीईसी परियोजना के तहत काफी निवेश कर चुका है.आइएमएफ को इस बात का डर है कि पाकिस्तान सीपीईसी मामले में पारदर्शिता नहीं दिखा रहा है. ऐसे में उसकी साहयता का गलत इस्तेमाल न हो.

तीन अमेरिकी सांसदों ने कर दिया था विरोध

पाकिस्तान अंतरर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की मांग कर रहा है ताकि वह खुद को कर्ज की गंभीर स्थिति से बचा सके जो कि देश की अर्थव्यवस्था को मुश्किल में डाल सकता है. चीन की सहायता से, पाकिस्तान को अब तक चालू वित्त वर्ष के दौरान मित्र देशों से वित्तीय सहायता पैकेजों में कुल 9.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए हैं.

कुछ दिन पहले अमेरिका के तीन प्रभावशाली सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से आईएमएफ की ओर से पाकिस्तान को मिलने वाले प्रस्तावित बेल आउट पैकेज का विरोध करने का अनुरोध किया था. उनका कहना था कि इन पैसों का उपयोग पाकिस्तान चीन का कर्ज उतारने में करेगा.

वित्त मंत्री ने लगाया न्यूयार्क का चक्कर
पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने इससे पहले इसी महीने कहा था कि आईएमएफ का एक दल विश्व बैंक के साथ ग्रीष्मकालीन बैठक के तुरंत बाद यहां आने वाला है. उन्होंने कहा था कि अप्रैल महीने के अंत तक राहत पैकेज पर हस्ताक्षर हो जाएंगे. सूत्रों ने बताया, “अब आईएमएफ का दल अप्रैल के बजाय मई में यहां आ सकता है.”

बेल आउट पैकेज को लेकर पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले वित्त मंत्री उमर शुक्रवार को न्यूयॉर्क गए थे, लेकिन उनकी टीम आगे की वार्ता के लिए वाशिंगटन में रुकी रही. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दोनों पक्ष बेल आउट पैकेज को लेकर एक समझ तक पहुंच गए हैं और एक या दो दिन में हम एक पूर्ण समझौते तक पहुंचने की उम्मीद करते हैं.

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