जैश चीफ को बैन करने पर कल संयुक्त राष्ट्र की अहम बैठक, इससे पहले चीन ने दिया चौंकाने वाला बयान

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Lu Kang.

नयी दिल्ली : पुलवामा आतंकी हमले के दोषी जैश-ए-मोहम्मद के सरगना को अंतराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने और दुनिया भर में प्रतिबंधित करने अमेरिका और फ्रांस के प्रस्ताव पर बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा व वोटिंग होगी. 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं, जिन्हें इस प्रस्ताव का वीटो करने का अधिकार प्राप्त है. संयुक्त राष्ट्र संघ के सुरक्षा परिषद का चीन स्थायी सदस्य है, जिसने एक बार फिर मसूद अजहर को बैन करने को लेकर एक प्रकार से अपनी अरुचि दिखायी है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा है कि इस संबंध में सभी मानक और नियमों का पालन होना चाहिए.

लू कांग ने कहा कि चीन इस मामले का उचित ढंग से समाधान करने के लिए सभी पक्षों के साथ संवाद एवं काम करना जारी रखेगा. उन्होंने यह बात इस संबंध में पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब में कही. उन्होंने कहा कि केवल जिम्मेवार और गंभीर चर्चा के माध्यम से ही निर्णय लेकर हम इसका स्थायी समाधान कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि पहले मैं कहना चाहूंगा कि संयुक्त राष्ट्र के एक मुख्य निकाय के रूप में सुरक्षा परिषद के पास सख्त मानक और प्रक्रिया के नियम हैं.

Masood Azhar File Photo.

बुधवार को इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र की 1257 कमेटी की बैठक से पहले चीन का यह बयान जैश को बैन करने के प्रति उसकी अरुचि के संकेतक के रूप में देखा जा रहा है. सुरक्षा परिषद में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस व इंग्लैंड पांच देश स्थायी सदस्य हैं, जिसमें अमेरिका, फ्रांस व इंग्लैंड ने मसूद के खिलाफ संयुक्त रूप से प्रस्ताव लाया है और रूस ने इस पर समर्थन का संकेत दिया है. इन देशों ने पुलवामा हमले के बाद यह प्रस्ताव लाया और पाकिस्तान को आतंकवाद पर कार्रवाई करने को भी कहा. दस साल में यह चौथा मौका है जब आतंकवादी अजहर के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में इस तरह का प्रस्ताव आया है और पूर्व में भी चीन इसका वीटो करता रहा है.

चीन का यह बयान ऐसे वक्त में आया है भारत के विदेश सचिव विजय गोखले इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले अमेरिका के दौरे पर गये हैं. उनका अमेरिकी प्रशासन के कूटनीति व सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात का सिलसिला जारी है.

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