पांच बार के सांसद रवीन्द्र पांडेय के टिकट कटने से गुस्से में क्यों हैं भाजपा समर्थक ?

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गिरिडीह से भाजपा के पांच बार के सीटिंग सांसद रवीन्द्र पांडेय का टिकट काटकर आजसू को देने की घोषणा जब से हुई है. तब से लोकसभा क्षेत्र में भाजपा समर्थक नाराज चल रहे हैं. 1996 से चुनाव जीतते आये रवीन्द्र पांडेय को सिर्फ एक बार टेकलाल महतो के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. यह टिकट भाजपा ने अपने सहयोगी दल आजसू को देने की घोषणा की है. पिछली बार आजसू के आजसू के डॉ यूसी मेहता 55 हजार 531 वोट लाये थे और चौथे नंबर पर थे.

पार्टी के लिए यह इतना नुकसानदेह या सही निर्णय साबित हो सकता है. इसका मूल्यांकन आने वाले चुनाव में होगा. झारखंड में बीजेपी के उद्भव और बीच में इसके बिखराव को लेकर कई तरह की बाते कहीं जाती है. हालिया एबीपी और सी वोटर्स के सर्वे भी भाजपा के खिलाफ संकेत जता रहे हैं.

भाजपा से जब बाबूलाल मरांडी ने नाराज होकर पार्टी को अलविदा कहा था, उसके बाद बीजेपी को झारखंड की सत्ता में आने में लंबा अरसा लगा. पुराने नेताओं का विकल्प खोजने में पार्टी को वक्त लगता है और कई बार यह विकल्प मिल नहीं पाता है. रवीन्द्र पांडेय का गिरिडीह लोकसभा में उनका अच्छा प्रभाव रहा है. यही वजह है कि वह लगातार जीतते आये हैं. वह शुरुआती दौर के सांसद है जब बीजेपी राज्य में अपना प्रभाव जमा रही थी.

आजसू ऐसी पार्टी है जो लगातार हार का सामना कर रही है. गिरिडीह में पार्टी का न तो कोई संगठन है और न ही कार्यकर्ता. आजसू का प्रभाव रांची तक है. जहां भी आजसू के सुप्रीमो सुदेश महतो चुनाव हार गये. झारखंड बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष रवीन्द्र राय आजसू के टिकट देने के फैसले को लेकर मुखर विरोध करते नजर आते हैं और मीडिया चैनल से बातचीत में उन्होंने यहां तक कह दिया है कि आजसू भाजपा के कमाये हुए धन में अपना हिस्सा चाहती है. नाराज रवीन्द्र पांडेय ने पार्टी की निर्णय पर हैरानी जताते हुए कहा कि पार्टी को गिरिडीह सीट यदि आजसू को दान ही करनी थी तो कम से कम एक बार कह दिया होता. एकलव्य की तरह अंगूठा भी दान में दे देता.

आजसू बिहार की नीतीश नहीं, जिसके लिए इतना त्याग किया जाये
पिछले 25 सालों से बीजेपी से जुड़े एक कार्यकर्ता ने नाम न छापे जाने के शर्त पर कहा कि आजसू के सुदेश महतो बिहार में जदयू के नितीश कुमार नहीं है. जिनके लिए भाजपा इतना त्याग करे. बिहार में भाजपा और जदयू दोनों एक दूसरे के स्वभाविक दोस्त है और दोनों को इस गठबंधन का फायदा हुआ है लेकिन जिस गिरिडीह सीट के लिए आजसू दावा ठोक रही है. वहां आजसू का ट्रैक रिकार्ड देखा जाये तो कोई आधार नहीं बनता है कि टिकट दिया जाये. वहीं कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि रवीन्द्र पांडेय की छवि निर्विवाद रही है और उन्होंने पार्टी पर किसी तरह की दबाव की रणनीति नहीं अपनायी है.

!!पवन!!

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