कच्चे तेल की कीमत में करीब 40% की गिरावट, फिर भी आपको आधे से भी कम ट्रांसफर क्यों?

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नयी दिल्ली : एक अक्तूबर से अबतक कच्चे तेल की कीमत में 37 से 40 प्रतिशत के बीच गिरावट आ चुकी है. बावजूद इसके भारतीय खुदरा तेल कंपनियों ने ग्राहकों को अबतक इसके आधे से भी कम यानी मात्र 17 से 18 प्रतिशत कटौती लाभ ट्रांसफर किया है. इसकी एक साधारण से वजह यह है कि तेल की लगातार बढती कीमतों के बाद सरकार के द्वारा रक्षात्मक उपाय के तहत विभिन्न स्तरों पर दी गयी छूट को बंद कर दिया गया है. कच्चे तेल की वैश्विक स्तर पर कटौती के कारण तेल विक्रेता कंपनियां ने अपने मार्जिन में एक रुपये की कटौती रोक दी है.

सरकार के हस्तक्षेप से बढती कीमतों के बीच तेल कंपनियों ने प्रति लीटर अपने मुनाफे में एक रुपये की कटौती की थी. अब जब कच्चे तेल की कीमतों में पर्याप्त कमी आ गयी है तो पेट्रोलियम कंपनियां अपने मुनाफे में कमी झेलने को तैयार नहीं है. अक्तूबर में ही बढती कीमतों के शोर के बीच वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सरकार के स्तर पर पेट्रोल व डीजल का प्रति लीटर प्रोडक्शन टैक्स 1.5 रुपये कम करने का एलान किया था और उन्होंने पेट्रोलियम कंपिनयों को निर्देश दिया था कि वे अपने मुनाफे में एक रुपये की कमी करें.

एक अधिकारी ने इस संबंध में कहा कि अब जब पेट्रोलियम की कीमतें कम हो गयीं हैं तो अपने नुकसान की भरपाई करने में सक्षम हैं. यानी अब जब तेल की कीमतें कम हो गयीं हैं तो उसके पूरे लाभ को तेल उत्पादक कंपनियां ट्रांसफर करने को तैयार नहीं है. वे इस दौरान हुए अपने मार्जिन नुकसान की भरपाई कर लेना चाहती हैं. जानकारों का मानना है कि 2019 के मार्च तक तेल उत्पादक कंपनियां नुकसान की भरपाई कर लेंगी.

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