इंटरव्यू के दौरान एक महिला कहती हैं- उनको बचपन में धनुष तोड़ने का बेहद शौक था। इसके लिये हर हफ्ते दर्जनों धनुष बनाए जाते थे। वे सभी इस तरह से बनाए जाते थे कि उन्हें तोड़ने के दौरान ज्यादा कोशिश नहीं करनी पड़े। ऐसे में धनुष जल्दी ही टूट जाते थे। वे ऐसा इसलिए करते थे, क्योंकि रामायण की कथा में जब राम धनुष तोड़ते थे तो उनको सीता दिखती थी। उस समय तो ऐसा कुछ नहीं हो पाता था, लेकिन बाद में मैं उनको मिली। मेरा गांव भी मां सीता के गांव के बेहद पास में ही था।

इसी दौरान उक्त महिला के पति भी कहते हैं- हां, यह सच था। मुझे सीता की तलाश रहती थी। इसलिए ही धनुष तोड़ता था। पर, जब मैं पहली बार इनसे मिला था, तो पहली नजर का प्यार परवान चढ़ा था। नर्वस हो गया था कि क्या कहूं। न शब्द थे न उनको व्यक्त करने के लिये उस समय उपयुक्त शब्द। मैं कभी चेहरे को देखता और कभी जमीन को। मेरे साथ मेरी कजिन और मामी थीं। उनलोगों ने किसी तरह मामला संभाला। कहने को तो यह एक अरेंज्ड मैरिज थी, लेकिन यह पहली नजर का प्यार था।

हैरान मत हों, क्योंकि जो शख्स है उसका नाम है- कीर्ति झा आजाद और महिला उनकी पत्नी हैं। उनका नाम है- पूनम झा आजाद। कीर्ति अपने राजनीतिक कैरियर और क्रिकेट में योगदान के लिये काफी विख्यात हैं। फिलहाल, वे भाजपा के सांसद हैं। पर, निलंबित हैं। दूसरी ओर, उनकी पत्नी भी राजनीति में दिलचस्पी रखती हैं। पहले वे भी भाजपा में थीं। बाद में आम आदमी पार्टी में गईं और पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस में हैं। एक वक्त था, जब कीर्ति दिल्ली में राजनीति करते थे। बाद में वे बिहार शिफ्ट हुए।

कीर्ति की बात इसलिए हो रही है,क्योंकि उनका आज जन्मदिन है। क्रिकेट में जब भारत ने पहली दफा विश्वकप जीता था, तो सेमीफाइनल में उन्होंने अपने आलराउंड खेल से बेहतरीन प्रदर्शन किया था। बाद में राजनीति में आ गये। पिता भागवत झा आजाद कांग्रेसी थे। बिहार में कांग्रेस ने उनको मुख्यमंत्री भी बनाया था। वैसे इनका पूरा परिवार संयुक्त बिहार के गोड्डा का रहनेवाला था, लेकिन राजनीतिक जमीन दरभंगा में ही थी। ऐसे में मिथिलांचल का जर्रा-जर्रा कीर्ति महसूस करते हैं।

उक्त वाकया उनकी शादी के ठीक पहले का है। तब उनकी मां इंदिरा झा आजाद अपने लिये बहू खोज रही थीं। पूनम का परिवार भी मिथिलांचल से ताल्लुक रखता था। साथ ही वे पटना वीमेंस कॉलेज में पढ़ती भी थीं। जब कीर्ति की मां ने उनको लड़की को देखने के लिये अपनी कुछ महिला रिश्तेदारों के साथ कॉलेज भेजा तो वहां कीर्ति की पहली मुलाकात पूनम से हुई थी। कीर्ति नर्वस हो गये थे। क्योंकि, उनके ही शब्दों में यह पहली नजर का प्यार था।

शादी के बाद शुरुआती दिनों में कीर्ति और उनकी पत्नी।

बिहार के दरभंगा जिले के वर्तमान सांसद कीर्ति आज़ाद का जन्‍म 2 जनवरी, 1959 को बिहार के ही पूर्णियां में हुआ था। इन्होंने दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में स्‍नातक किया है। वे 1983 में विश्वकप जीतने वाली टीम के सदस्य रह चुके हैं। राजनीतिक जीवन की शुरुआत कीर्ति ने 1993 में भारतीय जनता पार्टी के सदस्‍य के रूप में की थी।1998 तक वे दिल्‍ली विधानसभा के सदस्‍य रहे। 1999 में वे लोकसभा चुनाव में जीते। 2009 में वे लोकसभा चुनावों में दोबारा विजयी रहे। 31 अगस्‍त 2009 को उन्‍हें मानव संसाधन विकास समिति का सदस्‍य मनोनीत किया गया था। बाद 9 जून, 2013 से उन्‍हें गृह समिति का सदस्‍य भी बनाया गया था।

(बिहार डेस्क प्रस्तुति)

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