नामी वकीलों की फौज भी बिहार में कांट्रेक्ट टीचर्स को नहीं दिला पायी जीत

0
6
file photo

बिहार में काम के आधार पर स्थायी शिक्षकों के समान ही वेतन की मांग कर रहे करीब 3.5 लाख नियोजित शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने शुक्रवार को बिहार सरकार की अपील मंजूर करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया. गौरतलब है कि नामी वकीलों की फौज भी बिहार के कांट्रेक्ट टीचर्स को जीत नहीं दिला पायी. साढ़े तीन लाख शिक्षकों की ओर से कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, सलमान खुर्शीद जैसे वकील लड़ रहे थे.

नियोजित शिक्षकों की ये लड़ाई 10 साल पुरानी है जब 2009 में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने बिहार में नियोजित शिक्षकों के लिए समान काम समान वेतन की मांग पर एक याचिका पटना हाइकोर्ट में दाखिल की थी.

कोर्ट में सरकार ने क्या तर्क दिये
सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा था कि शिक्षकों की नियुक्ति और वेतन देना राज्य सरकार का काम है. इसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं है. केंद्र ने तर्क दिया था कि नियमित शिक्षकों की बहाली बीपीएससी के माध्यम से हुई है. वहीं नियोजित शिक्षकों की बहाली पंचायती राज संस्था से ठेके पर हुई है, इसलिए इन्हें समान वेतन नहीं दिया जा सकता है.

केंद्र की तरफ से अटॉर्नी जनरल ने नियोजित शिक्षकों के बारे में कहा कि सर्व शिक्षा अभियान मद की राशि राज्यों की जनसंख्या और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर दी जाती है, न कि वेतन में बढ़ोतरी के लिए. सर्व शिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार राज्यों को केंद्रांश उपलब्ध कराती है. केंद्र इस राशि के अलावा वेतन के लिए राशि नहीं दे सकती है. राज्य सरकार चाहे तो अपने संसाधन से समान काम के बदले समान वेतन दे सकती है.

अब तक हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का तर्क है कि एक राज्य के शिक्षकों को यह लाभ दिया गया तो दूसरे राज्यों से भी मांग उठेगी. सरकार की तरफ से ये दलील दी गयी है कि सरकार आर्थिक रूप से शिक्षकों को वेतन देने में सक्षम नहीं है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here