कोरेगांव में कड़ी सुरक्षा के बीच सैकड़ों लोगों ने ‘जय स्तंभ’ पर अर्पित की श्रद्धांजलि

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मुंबई : वर्ष 2019 के स्वागत में जहां चारों तरफ हंसी-खुशी और बधाईयों का माहौल है, वहीं पुणे के भीमा कोरेगांव में तनाव फैला हुआ है. किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए पूरे महाराष्ट्र में हाई अलर्ट लागू कर भीमा कोरेगांव में 10 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं. मालूम हो कि 2018 के नव वर्ष के मौके पर भी भीमा कोरेगांव में काफी हिंसा हुई थी.

इस बार यूपी की भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण ने एक जनवरी को भीमा-कोरेगांव की 201वीं वर्षगांठ पर वहां पहुंचने की घोषणा कर रखी है. हालांकि प्रशासन ने उन्हें रैली की इजाजत नहीं दी है. इसी के मद्देनजर वहां अलर्ट लागू किया गया है. इस मौके पर आइये जानते हैं क्या है भीमा कोरेगांव और उससे जुड़ा दलितों का गौरमयी इतिहास.

बता दें कि बीते साल 1 जनवरी 2018 को इसी इलाके में भीमा कोरेगांव हिंसा की 200वीं बरसी पर हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान भारी हिंसा हुई थी. 1 जनवरी  को पुणे से 40 किलोमीटर दूर कोरेगांव-भीमा गांव में दलित समुदाय के लोगों का एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसका कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने विरोध किया था. इसी कार्यक्रम के दौरान इस इलाके में हिंसा भड़की थी, जिसके बाद भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी और दुकानों-मकानों में तोड़फोड़ की थी. इस हिंसा में एक शख्स की जान चली गई और कई लोग जख्मी हो गए थे. इस घटना के एक साल पूरे होने और भीमा कोरेगांव संघर्ष की 201वीं वर्षगांठ के मद्देनजर मंगलवार को भी यहां एहतियात के तौर पर कड़े सुरक्षा इंतजाम रहे.

500 सीसीटीवी कैमरों से हुई निगरानी

इस बारे में जानकारी देते हुए महाराष्ट्र पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि जातिगत संघर्ष और हिंसा की आशंकाओं के मद्देनजर मंगलवार को भीमा-कोरेगांव और आसपास के हिस्सों में 5 हजार पुलिसकर्मी, 1200 होमगार्ड और राज्य रिजर्व पुलिस बल की 12 कंपनियां तैनात रहीं. वहीं पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ ही 500 सीसीटीवी कैमरे, 11 ड्रोन कैमरे और 40 विडियो कैमरों को भी कार्यक्रम की निगरानी के लिए लगाया गया. सुरक्षा के तमाम इंतजामों के बीच इलाके में मंगलवार को इंटरनेट सेवाएं भी स्थगित रहीं.

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