सबसे मुश्किल है किसी चीज की शुरुआत करना

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जीवन में फैसला नहीं लेना भी एक बड़ा फैसला होता है. अकसर इंसान ज्यादातार वक्त अपने फैसले के इंतजार में गुजार देता है. एक लीडर और फॉलोअर में इस बात का फर्क होता है कि लीडर फैसला लेना जानता है और उस फैसले के साथ खड़ा होना. बिना फैसला लिये आप कोई काम नहीं कर सकते हैं. आप अपने जीवन में दस काम करने का फैसला लेते हैं. संभव है दस में से दो निर्णय गलत होता है तो आप उस दो फैसले से भी सीखते हैं. इस दौरान आपको एक मेंटल स्ट्रेन्थ हासिल होता है. अगर आपकी सोच इंतजार की है तो आप परिस्थितियों के गुलाम होते जाते हैं.

दरअसल हमारी हर चीज दिमाग में पैदा सोच से शुरू होती है. जब हम कोई मकान बनाने की तैयारी करते हैं तो सर्वप्रथम वह दिमाग में ही बनता है. अगर आप कोई काम करना चाहते हैं और उसे लेकर आपके मन में उत्साह नहीं है तो आप दूसरे को भी प्रेरित नहीं कर पायेंगे. रिसर्च के अनुसार अगर सात लोगों का दिमाग एक साथ मिलकर काम करे तो वह अपना बेहतरीन रिजल्ट देता है लेकिन इन सात लोगों की सोच एक दिशा में काम करनी चाहिए.

उदाहरण के लिए कोई उद्यम लगाना चाह रहा है तो उसे सबसे पहले सकरात्मक माहौल बनाना होगा. अगर सात लोगों की टीम में एक का भी दिमाग नकरात्मक हो जाये तो वह रिजल्ट नहीं दे पाता है. आप इसे किसी आर्केस्ट्रा टीम के उदाहरण से समझ सकते हैं. कैसे आर्केस्ट्रा में हर कोई अलग – अलग म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाया करता है. अगर सारे लोगों में तारतम्यता न हो तो वह अच्छा म्यूजिक नहीं दे सकता है. यहां सभी का अलग – अलग वाद्य यंत्रों में पारंगत होना भी जरूरी हो जाता है क्योंकि एक ही वाद्य यंत्र से संगीत नहीं निकल सकता है.

यहां सृजन की एक खास बात है जो हर जगह लागू होती है. कोई भी चीज अचानक नहीं होती है बल्कि उसका धीरे – धीरे विकास होता है. अगर आप कोई भी चीज शुरुआत करते हैं तो अचानक से आप पायेंगे कि आपके सपनों को साझा करने वाले बहुत सारे लोग है. क्योकि यह इंसानी प्रवृति है कि उसके मन के अंदर जिज्ञासा रहती है कि अगला क्या कर रहा है. किसी भी चीज का सबसे मुश्किल घड़ी शुरुआत ही होता है.

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