अभिलाषा-दीपशिखा की शादी : बोलीं- डर के आगे जीत है, साथ जिएंगे और साथ मरेंगे अब

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शादी के बाद अभिलाषा और दीपशिखा अपने घर के बाहर (साभार- बीबीसी. हिंदी)।

नई दिल्ली। इस इलाके में ऐसी चर्चा है कि जिन दो महिलाओं ने अपने-अपने पतियों को तलाक देकर शादी कर ली है, उन्होंने यूपी के हमीरपुर जिले में तीर्थ स्थान कल्प-वृक्ष का दर्शन किया था और अपने प्रेम को मुकाम पर ले जाने की दुआ मांगी थी। कुछ दिन पहले ही दोनों विवाहित महिलाओं ने अपने-अपने पतियों को छोड़ा और शादी कर ली है। बात हो रही है 25 साल की अभिलाषा और 21 साल की दीपशिखा की। दोनों ही यूपी के हमीरपुर जिला की राठ तहसील की रहनेवाली हैं।

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अभिलाषा ने अपने पति को यह सब बताया और कहा- मैं दीपशिखा से प्रेम करती हूं। मैं आपसे तलाक चाहती हूं। इस पर उसके पति ने तलाक दे दिया। पर, दीपशिखा का पति इतना समझदार नहीं है और वह तलाक की लड़ाई लड़ रहा है। मामला कोर्ट में लंबित है, लेकिन वह कई महीनों से अपने पति से अलग है। शादी करने के बाद पति बनी अभिलाषा और पत्नी बनी दीपशिखा ने वरमाला पहने अपने घर आ गईं। दोनों अभी अभिलाषा के घऱ पर ही रह रही हैं। क्योंकि, अभिलाषा के पिता इस हालात को समझते हैं। वे कहते हैं- उनको दुनिया की परवाह नहीं कि कौन क्या कहता है। जबतक दोनों अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाते, मैं उनको अपने घर में ही रखूंगा।

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जब इस शादी की चर्चा आसपास के इलाकों में चलने लगी तो लोगों ने इस परिवार को अजीब और थोड़ी सामाजिक हिकारत की नजरों से देखने लगे। जब भी मीडिया की कोई टीम उनके गांव पहुंचती है और अभिलाषा के घर के बारे में पूछती है तो जबाव बड़ा अजीब रहता है। व्यंग्य भरी मुस्कुराहट के साथ लोगों की नजरें सवाल उठाती हैं और कहती है- अच्छा…उन लड़कियों का घर, जिन्होंने आपस में शादी कर ली है।

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अभिलाषा का गांव हमीरपुर जिला मुख्यालय से लगभग 80 किमी दूर है। विकास का गाथा से दूर और बुनियादी सुविधाओँ को तरसते इस गांव में समलैंगिक शादी का होना उन परिवर्तनों की ओर इशारा करता है, जहां शादी का मतलब फिर से पारिभाषित होता दिखता है। दोनों का प्यार छह-सात साल पुराना है। गांव आसपास होने की वजह से दोनों ही एक-दूसरे को काफी पहले से जानती हैं। पठानपुरा गांव में रह रही अभिलाषा को इस बात का सुकून है कि कम से कम उसके परिवार ने तो हालात को समझा है। क्योंकि, दीपशिखा के परिवार ने तो उससे सारे संबंध ही तोड़ लिये हैं।

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दीपशिखा का कहना है कि उसकी शादी निबंधित नहीं हो पा रही है, क्योंकि रजिस्ट्रार ऑफिस का कहना है कि उसे अभीतक समलैंगिक शादी की वैधता के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई पत्र नहीं मिला है। सच यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही समलैंगिक शादी को कानूनन जायज करार दिया है। जबतक इस संबंध में पत्र नहीं मिलता, तबतक हमारी शादी गैर-कानूनी ही रहेगी।

अब दोनों को ही चिंता अपना घर बनाने की है। दीपशिखा को काफी उम्मीद अभिलाषा से है। वह ग्रेजुएज है और नौकरी के लिये कोशिशों में जुटी हुई है। उनकी चाहत है कि जल्द ही कोई नौकरी मिल जाए तो हम यहां से शिफ्ट हो जाएंगे। ताकि, इस हिकारत भरी नजर से दूर हो सकें। कम से कम सुकून की सांस तो ले सकेंगे। अभिलाषा के पिता गुड़गांव में एक निजी नौकरी करते हैं। वे कहते हैं- मुझे तलाक के बारे में तो पता था, लेकिन दोनों के प्यार के बारे में कुछ भी पता नहीं। जब शादी कर घर आ ही गए हैं तो हम क्या कर सकते हैं।

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कहते हैं कि डर के आगे जीत है, जिंदगी है। यहां भी दोनों का यही हौसला उनका संबंल है। अभीतक शादी नाजायज ही है। लोगों में कानाफूसी का माहौल है। स्थानीय लोगों को इस बात की भी चिंता है कि उनके भी परिवार की लड़कियां बिगड़ सकती हैं। हालांकि, कोई तनाव नहीं है, पर अनहोनी की आशंका जरूर है। क्योंकि, इस इलाके में जहां महिलाएं अभी भी पुरुषों से भर मुंह बात नहीं कर सकतीं। सिर पर से पल्लू हटता नहीं, वहां समलैंगिक शादी को लेकर इनता तनाव और चिंता कोई आश्चर्य का कारण नहीं। फिर भी, दोनों का कहना है- हमे किसी से डर नहीं है, साथ जिएंगे और साथ ही मरेंगे अब।

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