उच्‍चतम न्‍यायालय का आदेश- विशेष भत्‍ता मूल वेतन का हिस्सा, पीएफ पर होगा फायदा

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नई दिल्‍ली। उच्‍चतम न्‍यायालय ने विशेष भत्ता (Special Allowance) को मूल वेतन (Basic Pay/Basic Wages) का हिस्सा मानते हुए उस पर अपनी मुहर लगा दी है। सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने बृहस्‍पतिवार को इस पर अपना आदेश दिया। इस आदेश के बाद कर्मचारियों के खाते में ज्यादा पीएफ जमा हो सकेगा। विशेष भत्‍ते को बेसिक पे में शामिल करने पर पीएफ के तौर पर जमा की जाने वाली राशि में इजाफा होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार न्‍यायमूर्ति अरुण मिश्रा और नवीन सिन्‍हा की खंडपीठ के सामने यह सवाल पूछा गया था कि क्या कंपनियों द्वारा कर्मियों को दिए जा रहे विशेष भत्ते को सेक्शन 2 (b)(ii) के तहत मूल वेतन के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए। खंडपीठ ने उस अपील को ठुकरा दिया जिसमें पीएफ कमिश्नर के फैसले को लेकर कंपनियों ने सवाल उठाया था।

पीएफ कमिश्नर ने अपने फैसले में कहा था कि विशेष भत्ता और मूल वेतन को एक साथ मिलाकर पीएफ जोड़ा जाना चाहिए। सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने इस पर फैसला देते हुए कहा कि कंपनियों द्वारा कोई ऐसा तर्क नहीं रखा गया, जिससे लगे कि विशेष भत्ता कर्मियों को उनके अच्छे प्रदर्शन के तौर पर दिया जाता हो।

न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा, भत्ते की संरचना (Allowance structure) और वेतन (Salary) के घटकों की जांच तथ्यों पर की गई है, यह अधिनियम के तहत प्राधिकरण और अपीलीय प्राधिकारी दोनों के द्वारा की गई है। जो एक तथ्यात्मक निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि जिस भत्‍ते पर सवाल उठाए जा रहे थे वह बेसिक पे का ही हिस्सा है, जबकि इसे पीएफ का हिस्सा बताकर दिया जा रहा है। इस फैसले का फायदा पीएफ के तौर पर 15000 तक के मूल वेतन और भत्ता जमा कराने वालों को मिलेगा।

वेतन संरचना (salary structure)
वेतन संरचना मुख्‍य रूप से दो तरह की होती है। पहला मूल वेतन (basic salary) और दूसरा विशेष भत्‍ते। मूल वेतन एक निश्चित राशि होती है। वहीं, विशेष भत्‍तों में महंगाई भत्ता (डीए), परिवहन भत्ता, मकान किराया, गाड़ी भत्ता और टेलीफोन/मोबाइल फोन भत्ता आदि आते हैं। कई कंपनियां सीटीसी में पीएफ और ग्रेच्युटी आदि को भी शामिल करती है।

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