‘एमटीएनएल में आपका स्‍वागत है’ कहीं बीते जमाने की बात ना हो जाए

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photo source: t.justdial.com

नई दिल्‍ली। वित्‍तीय समस्‍या से जूझ रहे महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) पर कहीं ताला न पड़ जाए। केंद्र सरकार ने नीति आयोग की सिफारिशों को मान लिया तो जल्‍द ही ‘एमटीएनएल में आपका स्‍वागत है’ जैसे शब्‍द बीते जमाने की बात हो जाएंगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एमटीएनल को अपने कर्मचारियों को वेतन तक देने के लाले पड़ रहे हैं। सरकारी टेलीकॉम कंपनी ने पिछले महीने डीओटी से आए कर्मियों के भुगतान के लिए 488 करोड़ रुपये की मांग थी। इन भुगतान में पेंशन और जीपीएफ की प्रतिपूर्ति भी शामिल है। इसके साथ ही कंपनी ने डीटीओ कर्मियों को दी जा रही दूरभाष सेवा की प्रतिपूर्ति की भी मांग की थी। इस अवधि में डीओटी ने सरकारी टेलीकॉम कंपनी का भवन और जमीन लीज पर दी थी, जिसके लिए एमटीएनएल ने किराये के रूप में 12 करोड़ रुपये की मांग की है।

नीति आयोग ने केंद्र सरकार को एमटीएनएल की परिसंपत्तियों के विनिवेश समेत कई विकल्‍पों पर विचार करने का सुझाव दिया है। काफी लंबे समय से घाटे में चल रही एमटीएनल का दूसरी सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल के साथ विलय का प्रस्‍ताव चल रहा था। ये प्रस्‍ताव भी ठंडे बस्‍ते में चला गया है। जिसके बाद दूरसंचार आयोग ने नीति आयोग से सुझाव मांगे थे। जिसके बाद नीति आयोग ने एमटीएनएल के पुनरुद्धार का असंभव सा बताते हुए उसे बंद कर देने का सुझाव दिया है। नीति आयोग के इस सुझाव के बाद दूरसंचार विभाग एमटीएनएल की संपत्तियों को बेचने के नए विकल्‍प खोजेगा। विभाग एमटीएनएल को 4जी स्‍पेक्‍ट्रम देना चाहता है। परंतु एमटीएनएल के पास तो अपने कर्मियों को वेतन तक देने के पैसे नहीं है।

बिक्री में कमी और वित्‍तीय लागत में वृद्धि की वजह से एमटीएनएल का घाटा लगातार बढ़ रहा है। एमटीएनएल का शेयर सोमवार को 12.20 प्रति शेयर पर बंद हुआ था। ये पिछले सत्र से एक फीसदी अधिक है। एमटीएनएल दिल्‍ली के अलावा मुंबई महानगर में भी दूरसंचार सेवाएं मुहैया करवाता है।

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