मैगी को भरनी पड़ सकती है 640 करोड़ की क्षतिपूर्ति, जानें कारण

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नई दिल्‍ली। उच्‍चतम न्‍यायालय ने नेस्‍ले इंडिया के खिलाफ क्षतिपूर्ति मांग वाली याचिका पर सुनवाई का रास्‍ता साफ कर दिया है। केंद्र सरकार ने नेस्‍ले इंडिया के खिलाफ कथित अनुचित व्यापार तरीके अपनाने, भ्रामक विज्ञापन और झूठी लेबलिंग को लेकर 640 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग कर रखी है। केंद्र ने यह मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के समक्ष दायर किया था। नेस्‍ले इंडिया इसके खिलाफ उच्‍चतम न्‍यायालय में गया था। उच्चतम न्‍यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए 16 दिसंबर 2015 इस पर स्‍टे लगा दिया था।

मामला साल 2015 का है, जब कई राज्‍यों में मैगी नूडल्‍स के नमूनों की जांच में लेड की अधिक मात्रा पाई थी। इसके बाद एफएसएसएआई ने भारत में एकछत्र राज करने वाली मैगी के नूडल्‍स पर प्रतिबंध लगा दिया था। केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) मैसूरू में मैगी नूडल्‍स की जांच की गई थी। जिसकी रिपोर्ट के अनुसार नमूनों में लेड का स्‍तर अत्‍याधिक पाया गया था और इसे मानव के लिए असुरक्षित और खतरनाक बताया गया था। बाद में मैगी अपने उत्‍पाद में सुधार का दावा करते हुए एक बार फि‍र से नूडल्‍स को बाजार में उतरा था।

उपभोक्‍ता मंत्रालय ने 2015 में ही नेस्‍ले इंडिया के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। ये शिकायत तीन दशक पुराने उपभोक्‍ता संरक्षण कानून के एक प्रावधान के तहत एनसीडीआरसी में कराई थी। सरकार ने भ्रामक विज्ञापन, झूठी लेबलिंग और अनुचित व्‍यापार तरीका अपनाने के खिलाफ कंपनी से 640 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी थी। इसके बाद नेस्‍ले इंडिया उच्‍चतम न्‍यायालय पहुंची, जहां पर उसे स्‍टे मिल गया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बृहस्‍पतिवार को उच्‍चतम न्‍यायालय में सुनवाई के दौरान वकीलों ने स्‍वीकार किया कि नूडल्‍स में लेड की मात्रा ज्‍यादा था। जबकि इससे पहले लेड की मात्रा को परमीसिबल सीमा के अंदर होने का दावा किया गया था। जिसके बाद न्‍यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सीएफटीआरआई मैसूरू की रिपोर्ट इस कार्यवाही का आधार होगी।

मालूम हो कि लेड की अत्‍याधिक मात्रा मनुष्‍य के लिए खतरनाक है। इससे किडनी और नर्वस सिस्‍टम प्रभावित हो सकता है। मैगी नूडल्‍स में तय सीमा 2.5 पीपीएम से अधिक काफी अधिक लेड पाई गई थी। कंपनी अपने विज्ञापनों में ‘टेस्ट भी हेल्दी भी’ का दावा भी करती थी।

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