क्रेडिट कार्ड का प्रयोग करते हैं, तो इन बातों का रखें ध्‍यान

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photo source: freepik.com

नई दिल्‍ली। देश में क्रेडिट कार्ड का इस्‍तेमाल करने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है, इसके साथ ही उससे जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। वहीं, कई बार क्रेडिट कार्ड धारक कई बार गलफत में भारी जुर्माने की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में क्रेडिट कार्ड धारक के लिए जरूरी है कि वह कुछ सावधनियां बरते और धोखाधड़ी से बचें। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड के प्रयोग को लेकर इन गलतियों से बचते हुए अपने को भारी भरकम जुर्माने से बचाए।

ऐसे बचें धोखाधड़ी से
हैलो, मैं फलां बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी से बोल रही हूं। आपने कार्ड से संबंधित ये जानकारी जल्‍द ही उपलब्‍ध नहीं करवाई तो आपका कार्ड ब्‍लॉक कर दिया जाएगा। ऐसी अनगिनत पता नहीं कितनी कॉलें रोज किसी न किसी को आती हैं और कोई ना कोई उनके झांसे में आ जाता है और फिर होता है उनके साथ धोखा। उनके क्रेडिट कार्ड से खरीददारी कोई और करता है और भारी भरकम बिल धारक के नाम पर आ जाता है। आपको ये ध्‍यान रखना चाहिए कि आपके पास जिस बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी का कार्ड हो। वे कभी भी आपसे आपके कार्ड से संबंधित जानकारी नहीं मांगते। यदि कोई आपसे से आपके क्रेडिट कार्ड का नंबर, पिन नंबर या कोई अन्‍य जानकारी मांगे तो आपको समझ जाना चाहिए कि ये जानकारी मांगने वाला बहुत बड़ा धोखेबाज है। इसलिए आप क्रेडिट कार्ड के पिन नंबर या उससे संबंधित जानकारी टेलीफोन या मोबाइल पर बात करने वाले शख्‍स का ना दें। इसके अलावा आपको विशेष तौर पर पेट्रोल पंपों या अन्‍य जगहों पर भुगतान करते हुए काफी साव धानी बरतनी चाहिए। आपके सामने EDC (इलेक्ट्रॉनिक डेटा कैप्चर) मशीन हो तभी अपने क्रेडिट कार्ड को सौंपें। ध्‍यान रखें की पिन डालते वक्‍त कोई आपको देख न रहा हो। पिन डालने से पहले ये भी देख लें कि आप कितनी राशि का भुगतान कर रहे हैं। भुगतान करने के बाद मिलने वाली स्लिप को संभालकर रखें।

नकदी निकासी
क्रेडिट कार्ड से एटीएम से नगदी निकालने पर निकाली गई रकम पर 2.5 प्रतिशत तक चार्ज लग सकता है। चार्ज के अलावा उसी दिन से निकाली गई राशि पर प्रतिमाह 2 से 4 फीसदी तक का ब्‍याज भी लगना शुरू हो जाता है। विदेशी मुद्रा निकासी यानि विदेश की यात्रा के दौरान ये चार्ज और बढ़ जाता है। इसलिए क्रेडिट कार्ड से बहुत अधिक जरूरत होने पर या आप‍तकालीन स्थिति में ही पैसे निकालने चाहिए। क्रेडिट कार्ड से बार-बार नगदी निकालना ठीक नहीं है, क्‍योंकि हर निकासी पर चार्ज का भुगतान करना पड़ता है।

समय पर करें भुगतान
क्रेडिट कार्ड धारक कई बार खरीददारी करने के बाद भुगतान समय पर नहीं करता। ऐसे में जहां उसको उस राशि पर भारी भरकम ब्‍याज के जुर्माना भी चुकाना पड़ता है। इसके साथ धारक की साख पर धब्‍बा लगता है और उसकी क्रेडिट कार्ड लिमिट आदि पर इसका सीधा-सीधा असर देखने को मिल जाता है। इसके अलावा कई बार कार्ड धारक को ब्‍लैकलिस्‍ट भी कर दिया जाता है, जिससे उसे ना तो क्रेडिट कार्ड पर ॠण मिल पाता है और ना ही दूसरा कार्ड भी नहीं मिल पाता। क्रेडिट कार्ड धारक को चाहिए कि वह समयसीमा के अंदर ही भुगतान करें। बैंक या कंपनियों द्वारा भेजे गए एसएमएस या ई-मेल को नजरअंदाज ना करें। ये भी ध्‍यान रखने वाली बात है कि समयसीमा पर भुगतान न करने से कार्ड धारक अगले महीने से ब्‍याज रहित खरीददारी का अधिकार खो देता है। यानि वह उस दौरान क्रेडिट कार्ड से जो भी खरीददारी करता है उस राशि पर ब्‍याज लगता है। हाथ तंग होने के बाद भी आपको न्‍यूनतम राशि का भुगतान जरूर करना चाहिए, ताकि आप पर जुर्माना न लग पाए। बैंक या कंपनी से अनुरोध कर भुगतान करने के लिए नियमित तिथि का चयन करें।

क्रेडिट कार्ड की सीमा
कभी भी क्रेडिट कार्ड के अधिकतम राशि का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि आप क्रेडिट कार्ड से ज्‍यादा खरीददारी करते हैं तो आपको दो-तीन अलग-अलग कंपनियों या बैंकों के क्रेडिट कार्ड लेने चाहिए। क्‍योंकि यदि आप किसी एक कार्ड से क्रेडिट लिमिट तक खरीददारी करेंगे तो आपका क्रेडिट स्‍कोर नकारात्‍मक हो सकता है, क्‍योंकि ऐसे कार्ड धारक की वित्‍तीय हालत सही नहीं मानी जाती है। ऐसे कार्ड धारकों के जल्‍द ही डिफॉल्‍टर बनने का भी खतरा बना रहता है। अलग-अलग कार्ड से खरीददारी करने से क्रेटिड लिमिट तक पहुंचने से बचा जा सकता है। इसके अलावा अपने खर्चों पर नियंत्रण रखकर भी कार्ड लिमिट से बचा जा सकता है। क्रेडिट कार्ड से अधिकांश खरीददारी करने वालों को हमेशा दो-तीन क्रेडिट कार्ड रखने चाहिए।

EMI की सुविधा
यदि आपने भारी भरकम खरीददारी कर ली है और आप समय सीमा के भीतर उसका भुगतान करने में असमर्थ हैं, तो आपको EMI की सुविधा ले लेनी चाहिए। EMI पर बैंक या कंपनी के हिसाब से 15 से 18 फीसदी की दर ब्‍याज भरना पड़ेगा। ये उससे बहुत कम होगा जो आपके द्वारा किए गए न्‍यूनतम भुगतान के बाद बची राशि पर ब्‍याज लगेगा। क्‍योंकि कंपनियां इस बकाया राशि पर 2 से 4 फीसदी तक ब्‍याज लेती है, जिसकी सालाना दर 24 से 48 फीसदी तक हो जाती है। इसके अलावा जबतक आपका बकाया रहता है, तबतक अगली कोई भी खरीददारी ब्‍याज मुक्‍त नहीं होती। इसका मतलब यदि आप जिस दिन भी कोई खरीददारी करेंगे उस पर उसी दिन से आपको ब्‍याज देना होगा। जो दिन पर दिन जुड़ते हुए एक मोटी राशि में परिवर्तित हो जाता है। इसलिए क्रेडिट कार्ड से उतनी ही खरीददारी करनी चाहिए जितनी का भुगतान आप आसानी से कर सकें।

रिवॉर्ड प्‍वाइंट्स
क्रेडिट कार्ड कंपनियां धारक को रिवॉर्ड प्‍वाइंट्स का प्रलोभन देती हैं, ताकि वे ज्‍यादा से ज्‍यादा खर्च करें। रिवॉर्ड प्‍वाइंट्स के लालच से कार्ड धारक को बचना चाहिए, उसे अपनी जरूरत के अनुसार ही क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा रिवॉर्ड प्‍वाइंट्स का मूल्‍य समय के साथ घटता बढ़ता है। इसलिए उनको जमा करने के लिए लंबे समय का इंतजार नहीं करना चाहिए। आज 1 हजार प्‍वाइंट वाला सामान छह महीने बाद 1100 प्‍वाइंट का भी हो सकता है। इसलिए समयबद्ध तरीके से इन प्‍वाइंट का प्रयोग कर लेना चाहिए। कई कंपनियां रिवॉर्ड प्‍वाइंट्स का प्रयोग बिल भुगतान के लिए भी करती हैं। ऐसे में इनका समय रहते प्रयोग कर लेना सही रहता है।

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