लोकसभा चुनाव : चौथे चरण का प्रचार थमा, जानें बिहार की पांच सीटों पर कैसा है मुकाबला

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पटना : बिहार में 29 अप्रैल को चौथे चरण में पांच लोकसभा सीटो पर वोट डाले जाएंगे. पिछले तीन चरणों में बिहार की 14 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है और चौथे चरण के मतदान के साथ लगभग आधी सीटों (19) पर वोटिंग पूरी हो जाएगी. चौथे चरण में बेगूसराय, उजियारपुर, दरभंगा, समस्तीपुर एवं मुंगेर में चुनाव होगा. इस चरण का मतदान इस मायने में अहम है कि यह विचारधाराओं की लड़ाई का प्रतीक साबित होने वाला है. इस चरण में परस्पर असहमति रखने वाले भी साथ हैं और उग्र हिंदुत्व के चेहरे के तौर पर देखे जाने वाले गिरिराज सिंह भी मैदान में हैं, जिनके लिए समाजवादी नीतीश कुमार भी वोट मांग चुके हैं.

कन्हैया कुमार के बहाने वामपंथ के लिए नये सिरे से बिहार में अपनी जमीन तलाशने का यह चुनाव मौका मुहैया करवा रहा है. वहीं, नीतीश का विकल्प बनने का उम्मीद लगाये उपेंद्र कुशवाहा को भी खुद का अस्तित्व इस चुनाव में साबित करना है. इस चुनाव में दरभंगा में जनता दरभंगा में कांग्रेस व राजद की दोस्ती का रंग भी परख लेगी और यह भी देखेगी कि मुंगेर में धुर विरोध लालू कुनबा व अनंत कुनबा का साथ आना क्या असर दिखा पाता है.

कुल मिलाकर बिहार के चैथे चरण के मतदान में नेता व विचारधारा अपनी तमाम विसंगतियों के बीच अस्तित्व की तलाश करते नजर आ रहे हैं. मौलिक रूप से असहमति की सोच वाले साथ हैं.

बेगूसराय

चौथे चरण की सबसे हाॅट सीट बेगूसराय है. बेगूसराय दो वजहों से हाॅट सीट है – एक तो अति हिंदुत्ववादी माने जाने वाले गिरिराज सिंह के मैदान में होने से और दूसरे उनके मुकाबले देश में वामपंथ को पोस्टर ब्वाॅय बन चुके कन्हैया कुमार के सीपीआइ के टिकट पर मैदान में कूदने की वजह से. वहीं, राजद के तनवीर हसन यहां महागठबंधन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

भूमिहार बहुल इस संसदीय सीट पर भाजपा व सीपीआइ दोनों दलों के उम्मीदवार इसी वर्ग से आते हैं. करीब चार लाख भूमिहार वोटों की एकजुटता यहां किसी की जीत तय कर सकती हैं, जबकि उसमें बड़ी टूट राजद की बांछे खिला सकता है. कन्हैया के खेमे को यह विश्वास है कि भाजपा विरोधी वोटों का धु्रुवीकरण उसके पक्ष में होगा. इसलिए गिरिराज ने यहां चुनाव में कहा कि उनका मुकाबला इस सीट पर किसी से नहीं खुद से हैं. सूत्रों का कहना है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें सलाह दी है कि वे सीधे कन्हैया कुमार पर हमले न करें, ताकि उसकी प्रासंगिकता बढ न जाये.


गिरिराज सिंह के लिए चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश कुमार.

मुंगेर

मुंगेर का रण भी बड़ा भारी है. यहां से नीतीश कुमार के बेहद करीबी राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह मैदान में हैं. जदयू उम्मीदवार के रूप में वे एनडीए का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उनका मुकाबला बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी से है जो कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में महागठबंधन का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. अनंत सिंह अपनी पत्नी को जीत दिलाने के लिए हर दिन खुद 40 – 50 गांवों का दौरा किया. 2008 के परिसीमन के बाद मुंगेर संसदीय क्षेत्र में ऐसे इलाके शामिल हुए जिससे यहां भूमिहारों की बहुलता हो गयी. ललन सिंह व नीलम देवी भूमिहार वर्ग से आते हैं और इसी संसदीय क्षेत्र के रहने वाले हैं.

लखीसराय-बाढ इलाके में अनंत सिंह छोटे सरकार के नाम से अपने समुदाय के लोगों में लोकप्रिय हैं. वहीं, ललन सिंह की छवि बिहार में भूमिहार वर्ग से आने वाले बड़े नेता की है, जिनकी सत्ता व सरकार पर गहरी पकड़ है. वे खुद नीतीश सरकार में वरिष्ठ मंत्री हैं. ललन सिंह ने जब अपना चुनाव प्रचार आरंभ किया था तो उन्होंने सबसे पहले यही कहा कि अब इस इलाके में किसी का आतंक नहीं चलने वाला है, कानून अपना काम करेगा.

मालूम हो कि 2015 के लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह बिहार की राजनीति को मोड़ देने वाले सबसे अहम फैक्टर थे. मोकामा में दो समुदाय के बीच तनाव पूर्ण स्थिति होने के बाद लालू प्रसाद यादव अपने बेटे तेजस्वी यादव को लेकर राघोपुर गये थे और वहां दो बड़े बयान दिए थे – एक कि यह चुनाव बैकवर्ड बनाम फारवर्ड है और दूसरा तेजस्वी यादव उनके उत्तराधिकारी होंगे. लालू ने लंबे समय बार अगड़ा बनाम पिछड़ा की बात की थी, जिसकी सबसे अहम वजह अनंत सिंह थे.

अब लालू के पुत्र तेजस्वी ने नीलम देवी के लिए प्रचार किया है और वोट मांगा है.

बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री राजीव रंजन सिंह।

उजियारपुर

उजियारपुर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय का मुकाबला राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से है. उपेंद्र कुशवाहा को महागठबंधन में चार सीटेें मिलीं, जिसमें दो काराकाट और उजियारपुर से वे खुद चुनाव लड़ रहे हैं. कुशवाहा काराकाट के सीटिंग एमपी हैं. जब उन्होंने नित्यानंद राय की सीटिंग सीट से लड़ने का फैसला लिया तो इसके पीछे उनकी कोई ठोस समझ होगी. राय यादव समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और कुशवाहा कोयरी समुदाय का.

कुशवाहा को उम्मीद है कि लालू के साथ गठबंधन होने की वजह से यहां यादवों का वोट उन्हें मिलेगा. इसके साथ ही अल्पसंख्यक, दलित जातियों व कांग्रेस का परंपरागत वोट भी हासिल होगा.

वहीं, नित्यानंद राय को भाजपा के कैडर, यादव वोटों, अगड़ा समुदाय व नरेंद्र मोदी एवं नीतीश कुमार की छवि का भरोसा है. इस सीट का परिणाम जो कुछ भी हो लेकिन इतना तो पक्का है कि कुशवाहा ने यहां से मैदान में उतर कर नित्यानंद राय के खिलाफ लड़ाई कठिन बना दी.

file photo

 

दरभंगा

दरभंगा लोकसभा सीट से राजद के बड़े नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी मैदान में हैं. उनका मुकाबला भाजपा के गोपाल जी ठाकुर से हैं. यहां से कीर्ति झा आजाद भाजपा के टिकट पर पिछली बार जीते थे, जो अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और पार्टी ने उन्हें धनबाद से उम्मीदवार बना दिया है.

दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी यहां से चुनाव प्रचार कर गए और उन्होंने आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा को मुद्दा बना दिया. पीएम ने आतंकवाद की जांच के दौरान दरभंगा माड्यूल की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसने यहां की प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुंचाया. अब ऐसा कोई माड्यूल ही नहीं होगा.

राजद के लिए यहां भाजपा विरोधी वोटों को गोलबंद रखने की चुनौती है. यहां से राजद के एक और नेता अली असरफ फातमी टिकट चाहते थे, वहीं कीर्ति झा आजाद को भी यही सीट पंसद थी. महागठंधन के घटक दल वीआइपी के मुकेश मल्लाह भी यहीं से चुनाव लड़ना चाहते थे, जिन्हें खगड़िया भेज दिया गया. यानी महागठंधन में ही इस सीट को लेकर तीन दिलजले हैं.

 

समस्तीपुर

समस्तीपुर से कल ही राहुल गांधी व तेजस्वी यादव चुनाव प्रचार कर गए हैं. यहीं तेजस्वी ने राहुल गांधी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया. यहां से कांग्रेस के अशोक कुमार मैदान में है जो पिंछली बार मोदी लहर में 6872 से कुछ अधिक वोटों से हारे थे. अशोक कुमार का मुकाबला लोजपा के उम्मीदवार रामचंद्र पासवान से है. यह भी माना जाता है कि कांटे की टक्कर में नोट बटन ही यहां निर्णायक हो जाता है. पिछली बार 29,211 लोगों ने यहां नोट दबावा था. अगर वह किसी के पक्ष या विपक्ष में सीधे वोट होता तो नतीजा कुछ और भी हो सकता था. महागठबंधन को यहां एमवाइ समीकरण पर भरोसा है.

 

 

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