बिहार : लोकसभा चुनाव का सातवें चरण में चार केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिष्ठा दावं पर, मैदान में मीरा, मीसा, कुशवाहा भी

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पटना : बिहार में लोकसभा चुनाव 2019 के तहत अबतक छह चरणों में 32 सीटों पर मतदान संपन्न चुका है. अब सातवें चरण में आठ और लोकसभा सीटों पर 19 मई को मतदान होना है. सातवें चरण में बिहार की नालंदा, पटना साहिब, पाटलीपुत्र, आरा, बक्सर, सासाराम, काराकाट और जहानाबाद में मतदान होना है. ये मगध एवं भोजपुरी पट्टी के वैसे इलाके हैं, सूबे के बड़े नेताओं की परीक्षा तो होगी ही, साथ ही सूबे के बिहार के दो सबसे बड़े राजनीतिक चेहरे नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक साख भी पता चलेगी. इस चरण में उपेंद्र कुशवाहा और मीसा भारती जैसे ऐसे उम्मीदवार हैं, जिनकी जीत और हार से नीतीश और लालू की राजनीतिक ताकत का आकलन किया जाएगा. यह चरण इस मायने में भी अहम है कि लालू के दोनों लाल तेजस्वी यादव एवं तेज प्रताप यादव ने पहली बार तीन सीटों पर एक साथ चुनाव प्रचार किया. ये सीटें हैं: आरा, नालंदा और पाटलीपुत्र.

इस चरण में एनडीए में भाजपा सबसे अधिक पांच सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिसमें चार पर उसके केंद्रीय मंत्री ही मैदान में हैं. भाजपा पटना साहिब, पाटलीपुत्र, आरा, बक्सर एवं सासाराम में चुनाव लड़ रही है. पटना साहिब से केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, पाटलीपुत्र से केंद्रीय राज्य मंत्री रामकृपाल यादव, आरा से पूर्व आइएएस और केंद्रीय मंत्री बिजली मंत्री आरके सिंह, बक्सर से केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चैबे मैदान में हैं. सासाराम सुरक्षित सीट से भाजपा के छेदी पासवान मैदान में हैं.

नालंदा, सासाराम और काराकाट से नीतीश कुमार का जनता दल यूनाइटेड चुनाव लड़ रहा है. नालंदा से निवर्तमान सांसद कौशलेंद्र कुमार मैदान में हैं. जहानाबाद से जदयू के चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी और काराकाट से महाबली सिंह चुनाव मैदान में हैं. काराकाट सीट इस मायने में अहम है कि यहां से रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा मैदान में हैं. नीतीश कुमार हर हाल में चहेंगे कि कुशवाहा हारें. कुशवाहा की पूरी राजनीति नीतीश कुमार के विरोध के इर्द-गिर्द घूमती है. वे कभी नीतीश के सानिध्य में ही राजनीति करते थे, लेकिन आज वे उनके सबसे बड़े विरोधियों में एक हैं और उन्हें लगता है कि जिस तरह नीतीश ने लालू को सत्तच्युत किया था, उसी तरह एक दिन नीतीश को सत्ता से बाहर कर देंगे. हालांकि यह बात वक्त ही बताएगा.

पटना साहिब

पटना साहिब में रविशंकर प्रसाद का मुकाबला कांग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा से है. इस सीट पर लगभग एक तिहाई कायस्थ वोटर हैं, जिनका झुकाव किसी एक ओर हो तो उस खेमे की जीत पक्की है. पर, इनके वोटों का बिखराव चुनाव को अधिक पेचीदा बना देगा. शत्रुघ्न सिन्हा और प्रसाद दोनों अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. रविंशंकर प्रसाद पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में उनके कौशल की भी इस बार परीक्षा होगी.

पाटलीपुत्र

पाटलीपुत्र में भाजपा के रामकृपाल यादव का मुकाबला राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारत से है. रामकृपाल यादव यहां हमेशा से मजबूत उम्मीदवार माने जाते हैं. रामकृपाल पहले राजद में ही हुआ करते थे और उन्हीं के समर्थन से लालू प्रसाद यहां से जीते थे. रामकृपाल पिछली बार तब राजद छोड़ कर भाजपा में चल गये जब उनकी जगह लालू ने अपनी बेटी मीसा भारती को उम्मीदवार बना दिया. रामकृपाल अपने संसदीय क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं.

बक्सर

बक्सर में अश्विनी चैबे का मुकाबला राजद के जगदानंद सिंह से है. जगदानंद सिंह को अश्विनी चैबे ने पिछली बार भागलपुर से यहां आकर मोदी लहर में हराया था. जगदानंद सिंह राजद के बड़े नेता हैं और उनकी छवि जनता के बीच बहुत अच्छी है. वहीं, केंद्रीय मंत्री चैबे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि और अमित शाह के चुनाव प्रबंधन से उम्मीदें हैं. यहां दोनों नेताओं के बीच कांटे की टक्कर है.

सासाराम

सासाराम हाइप्रोफाइल सीट है. दिग्गज राजनेता जगजीवन राम यहां से आठ बार सांसद चुने गए. 1984 में भी उन्होंने इंदिरा गांधी के मौत की वजह से कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति लहर होने पर भी अपनी पार्टी कांग्रेस जे के टिकट पर यहां से कांग्रेस को हरा दिया था. जगजीवन राम की आइएफएस बेटी मीरा कुमार बाद में राजनीति में आयी और पिता की विरासत को सहेजने का पूरा प्रयास किया. पिछले लोकसभा चुनाव में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार यहां पर भाजपा के छेदी पासवान से हार गयीं. इस बार फिर यहां इन दोनों के बीच मुकाबला है. इस संसदीय क्षेत्र में दलित, ब्राह्मण व राजपूत सबसे प्रभावशाली मतदाता समूह है और जीत-हार तय करने में उनका रुख ही अहम होता है.

आरा

आरा में पूर्व गृहसचिव आरके सिंह भाजपा के टिकट पर दूसरी बार भाग्य आजमा रहे हैं. आरके सिंह आरा के दामाद हैं, हालांकि वे रहने वाले मूल रूप से मिथिलांचल-कोसी इलाके के हैं. आरके सिंह अभी केंद्र में बिजली मंत्री हैं और उनका मुकाबला यहां सीपीआइ -एमएल के राजू यादव से है. यही एक सीट है, जिस पर वामपंथ को महागठबंधन से खुला समर्थन मिला है. ऐसा भाजपा विरोधी वोटों का बिखराव रोकने के लिए किया गया है. ऐसे में इस सीट पर चुनाव रोचक हो गया है. आरके सिंह के पक्ष में अमित शाह ने अभी दो दिन पहले ही चुनावी रैली को संबोधित किया है.

नालंदा

नालंदा में जदयू के मौजूदा सांसद कौशलेंद्र कुमार का मुकाबाला महागठबंधन की ओर से हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के अशोक आजाद कर रहे हैं. अशोक कुमार आजाद गया के टिकारी के रहने वाले हैं और पिछ़ड़ा वर्ग कहार जाति से आते हैं. जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार को उनके घर में मात देने के लिए आजाद को यहां से मैदान में उतारा है.

जहानाबाद

जहानाबाद में जनता दल यूनाइटेड के चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी का मुकाबला राजद के सुरेंद्र यादव से है. सुरेंद्र यादव के साथ दिक्कत यह है कि यहां से तेज प्रताप यादव ने लालू-राबड़ी मोर्चा के बैनर तले चंद्रप्रकाश को मैदान में उतारा है और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार भी कर आए हैं. तेज प्रताप उन्हें राजद का टिकट दिलाना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका तो अपने मोर्चे से मैदान में उतार दिया. यहां से पिछले बार रालोसपा के टिकट पर अरुण कुमार जीते थे लेकिन उपेंद्र कुशवाहा से उनका मतभेद हो गया जिसके बाद उन्होंने अलग गुट बना लिया. वे भी मैदान में हैं. यानी जहानाबाद में चतुष्कोणीय मुकाबले के आसार हैं.

काराकाट

काराकाट से उपेंद्र कुशवाहा चुनाव लड़ रहे हैं. बिहार में इस बार रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ही एकमात्र ऐसे हेवीवेट उम्मीदवार हैं जो दो सीटों से मैदान में कूदे हैं. अपनी सीटिंग सीट काराकाट के साथ वे भाजपा के प्रदेश के अध्यक्ष नित्यानंद राय के खिलाफ उनकी सीटिंग सीट उजियारपुर से भी चुनाव लड़ चुके हैं. काराकाट में कुशवाहा का मुकाबला जनता दल यूनाइटेड के महाबलि सिंह से है. कह सकते हैं कि सातवें चरण में नीतीश के लिए सबसे प्रतिष्ठा की लड़ाई इसी सीट पर है.

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