…तो जेटली ने बचायी थी अपने दोस्त नीतीश की मुख्यमंत्री की कुर्सी?

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सुशील कुमार मोदी के दावे के परिप्रेक्ष्य में पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण

पटना : भारतीय जनता पार्टी के मंझे हुए नेता सुशील कुमार मोदी ने आज बिहार की राजनीति में एक बड़ा दावा किया. उन्होंने जो दावा किया उसमें भाजपा के कद्दावर व बेहद प्रभावशाली नेता अरुण जेटली का नाम शामिल है. जाहिर है मीडिया में जेटली को लेकर कोई खुलासा करने से पहले सुशील कुमार मोदी ने उनसे औपचारिक रूप से मंजूरी जरूर ली होगी. सुशील कुमार मोदी ने आज दावा किया लालू प्रसाद यादव ने पहले अपने दूत प्रेम गुप्ता व फिर खुद जाकर अरुण जेटली से भेंट की थी और कहा था कि अगर वे चारा घोटाला मामले में सीबीआइ का उनके खिलाफ सुपीम कोर्ट में अपील रोकवा दें तो वे 24 घंटे के अंदर नीतीश कुमार की सरकार गिरा देंगे. सुशील मोदी के अनुसार, लालू ने जेटली से कहा था कि 24 घंटे में नीतीश का इलाज कर दूंगा. अगर सुशील कुमार मोदी का यह दावा सत्य है तो संभवतः लालू प्रसाद को ऐसा लगा होगा कि नरेंद्र मोदी के नीतीश के तल्ख रिश्ते की वजह से भाजपा उनसे प्रतिशोध लेना चाहेगी.

ध्यान रहे कि यह उन दिनों की बात है जब नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के राजनीतिक रिश्ते कटु थे. 2013 में मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाये जाने के सवाल पर नीतीश कुमार एनडीए से अलग हो गये थे और बाद में पुरानी कटुता को भूला कर राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से गठजोड़ कर लिया. वाजपेयी-आडवानी युग में नीतीश कुमार ने ही नरेंद्र मोदी के बिहार प्रवेश पर वीटो कर दिया था.

सुशील कुमार मोदी के आज के दावे के अनुसार, अरुण जेटली ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि वे सीबीआइ स्वायत्ता संस्था है और उसके काम में वे हस्तक्षेप नहीं कर सकते. मालूम हो कि 2017 में सीबीआइ ने रांची हाइकोर्ट द्वारा चारा घोटाला मामले में लालू को सुनवाई से राहत दिये जाने के बाद उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में लालू के खिलाफ फैसला देते हुए कहा था कि चारा घोटाले के सभी मामलों की अलग-अलग सुनवाई होगी. प्राकरांतर में लालू प्रसाद को जेल जाना पड़ा. उसी साल लालू के पुत्र तेजस्वी यादव पर माॅल निर्माण, भूमि घोटाले जैसे आरोप लगे, जिस पर लालू कुनबे का बयान नहीं आने के बाद नीतीश कुमार ने कई सप्ताह की चुप्पी के बाद यह कह कर रिश्ता तोड़़ लिया कि कफन में जेब नहीं होती. भ्रष्टाचार कर जाइएगा कहां.

नीतीश कुमार जब लालू से अलग हुए थे तो उन्होंने कई दफा संकेतों में यह कहा था कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही थी. उनका यह भी संकेत था कि उनकी सरकार गिराने की साजिश हो रही थी. हालांकि नीतीश कुमार ने खुल कर कभी पूरी बात नहीं कहा. अब जब सुशील कुमार मोदी ने आज यह खुलासा किया है तो यह सवाल उठता है कि क्या यही बात संकेत में नीतीश कुमार पहले कह रहे थे.

नीतीश कुमार व अरुण जेटली के बीच अच्छी मित्रता है. दोनों राजनीतिक रूप से साथ रहें हों या अलग-अलग दोनों के रिश्ते बेहद मधुर रहे हैं. सुशील कुमार मोदी के खुलासे से यह भी संकेत मिलता है कि संभवतः नीतीश कुमार की उनके गहरे मित्र अरुण जेटली ने साजिशों से पार पाने में मदद की हो. नीतीश कुमार ने 2017 के उत्तरार्द्ध में भाजपा से एक बार फिर गठबंधन कर सरकार बनाया. इसमें जेटली की भूमिका से कम से कम इनकार तो नहीं ही किया जा सकता है.

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