हिंदुओं और कश्‍मीरी पंड़ितों के लिए हंसते-हंसते कुर्बान हो गए थे गुरु तेगबहादुर जी

0
8
photo source: social media
  • गुरु तेगबहादुर जी के प्रकाश पर्व पर विशेष

नई दिल्‍ली। सिखों के नौवें गुरु गुरु तेगबहादुर जी बचपन से ही संत स्वरूप गहन विचारवान, उदार चित्त, बहादुर व निर्भीक स्वभाव के थे। गुरु हरगोबिंद सिंह के यहां अव‍तरित हुए गुरु जी का बचपन को नाम त्‍यागमल था। बचपन से ही निर्भीक त्‍यागमल की बहादुरी को सारे संसार ने उस समय देखा था जब उन्‍होंने अपने पिता के साथ मुगलों को लोहे के चने चबा दिए थे। गुरु जी उस समय मात्र 14 साल के थे। त्‍यागमल की इस बहादुरी से प्रभावित होकर उनके पिता उनका नाम तेगबहादुर रखा था। तेगबहादुर का मतलब तलवार का धनी होता है। मीरी-पीरी के मालिक गुरु-पिता गुरु हरिगोबिंद साहिब की छत्र छाया में गुरु जी ने अपनी शिक्षा-दीक्षा ग्रहण की थी। गुरु जी ने गुरुबाणी, धर्मग्रंथों के साथ-साथ शस्त्रों तथा घुड़सवारी आदि की शिक्षा भी प्राप्त की। हिंद दी चादर कहलाने वाले गुरु तेगबहादुर जी ने धर्म व मानवता की रक्षा करते हुए हंसते-हंसते अपने प्राणों की कुर्बानी दे दी थी। 8वें गुरु हरिकृष्ण राय जी ने अपनी नश्‍वर देह को त्‍यागते हुए गुरु तेगबहादुर जी को सिखों का गुरु बनाया गया था।

गुरु तेगबहादुर जी के समय में मुगल सम्राट औरंगजेब का राज था। औरंगजेब इस्‍लाम के अलावा किसी और धर्म की प्रशंसा नहीं सुन सकता था। औरंगजेब ने अपने शासनकाल में हिंदुओं पर मुस्‍लिम धर्म अपनाने के लिए बहुत जुल्‍म कर रहा था। इस्‍लमा के नाम पर उसने अपने सैनिकों को पूरी छूट दे रखी थी। औरंगजेब ने ये आदेश दे रखा था कि जो इस्‍लाम कबूल न करे उसे मौत के घाट उतार दिया जाए। धर्म के नाम पर हिंदुओं पर अत्‍याचार बढ़ने लगे थे। ऐसे में कश्‍मीरी पंड़ित गुरु तेगबहादुर जी की शरण में आए और अपनी रक्षा की गुहार की। उन्‍होंने बताया कि औरंगजेब कैसे-कैसे जुल्‍म उन पर कर रहा है। इस्‍लाम नहीं अपनाने की वजह से उनकी बहू्-बेटियों की इज्‍जत खतरे में हैं और उनकी पानी भरने वाली जगहों पर हड्डियां फेंकी जा रही हैं। उनके धर्म को भ्रष्‍ट करने की साजिश रची जा रही हैं।

कश्‍मीरी पंडित जब अपनी समस्‍याएं गुरु जी को बता रहे थे, तब गुरु जी के नौ वर्षीय सुपुत्र बाला प्रीतम (गुरु गोविंदसिंह) वहां आए। बाला प्रीतम के पूछने पर गुरु जी कश्‍मीरी पंडितों पर हो रहे जुल्‍म की दास्‍तां उन्‍हें बताई। इस पर बाला प्रीतम ने इसका निकारण पूछा तो गुरु जी ने कहा- इसके लिए बलिदान देना होगा। इतना सुनते ही बाला प्रीतम ने तुरंत कहा- इस समय मेरी नजर में पूरी धरती पर आपसे महान पुरुष कोई नहीं है। आपको भले ही कुर्बान हो जाना पड़े, परंतु आप इनके धर्म की रक्षा करें। बाला प्रीतम की बात सुनकर वहां उपस्थित सभी लोग सन्‍न रह गए। उन्‍होंने बाला प्रीतम से पूछा- आपके पिता की कुर्बानी से आप की मां विधवा हो जाएगी और आप यतीम। ऐसे में बाला प्रीतम ने कहा कि मेरी मां के विधवा होने से लाखों माएं विधवा होने से बच जाएंगी और मेरे यतीम होने से लाखों बच्‍चे यमीत होने से बच जाएंगे, ऐसी कुर्बानी मुझे मंजूर है।

बाला प्रीतम की बात सुनने के बाद गुरु तेगबहादुर जी ने कश्‍मीरी पंडितों से कहा कि औरंगजेब से जाकर कह देना कि यदि तुम गुरु तेगबहादुर को इस्‍लाम धर्म में लेकर आ गए तो हम भी इसे अपना लेंगे। यदि तेगबहादुर ने इस्‍लाम धर्म नहीं अपनाया, तो तुम भी हमसे जबरदस्‍ती नहीं कर पाओगे। औरंगजेब द्वारा इस बात को स्वीकार करने के बाद गुरु तेगबहादुर दिल्ली में औरंगजेब के दरबार में स्वयं चलकर पहुंचे। इस्‍लाम धर्म अपनाने के लिए औरंगजेब ने गुरु जी को तरह-तरह के लालच दी। गुरुजी जब टस से मस नहीं हुए तो उन्‍हें कैद कर लिया गया। गुरु जी के दो शिष्‍यों को उनके सामने ही मार दिया गया। परंतु गुरु जी पर बहुत अत्‍याचार किए गए। गुरु जी अपनी बात पर अटल रहे। उन्‍होंने औरंगजेब का समझाया भी कि किसी को भी जबरदस्‍ती इस्लाम धर्म में लाने वाला सच्‍चा मुसलमान नहीं हो सकता, क्‍योंकि इस्‍लाम किसी पर जुल्म करने की शिक्षा नहीं देता।

जिसके बाद गुस्‍साए औरंगजेब ने गुरु जी का शीश को काटने का हुक्म दे दिया। गुरु जी ने हंसते-हंसते अपना शीश कटवाकर बलिदान दे दिया। चांदनी चौक पर जहां पर गुरु जी ने अपनी कुर्बानी दी थी वहां उनकी याद में गुरुद्वारा शीश गंज साहिब का निर्माण किया गया है। हिंदुस्‍तान और हिंदू धर्म के लिए कुर्बान होने की वजह से गुरु तेगबहादुरजी को ‘हिन्द की चादर, गुरु तेगबहादुर’ भी कहा जाता है।

गुरु तेग बहादुर जी के ‘प्रकाश पर्व’ पर गुरुद्वारों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here