गुरु तेग बहादुर जी के ‘प्रकाश पर्व’ पर गुरुद्वारों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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photo source: social media

नई दिल्‍ली। गुरु तेग बहादुर जी का ‘प्रकाश पर्व’ आज पूरे विश्‍वभर में बड़े हर्षोल्‍लास के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन मौके पर गुरुद्धारों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है और गुरुद्वारों में भव्य कार्यक्रम सहित गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया जा रहा है। जगह-जगह सामूहिक भोज (लंगर) का आयोजन किया गया है।

इस पावन मौके पर चांदनी चौक स्थित गुरुद्वारा शीशगंज की शोभा देखते ही बनती है। यहां पर गुरुद्वारे को विशेष रूप से सजाया गया है और गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया जा रहा है। वहीं, रकाबगंज गुरुद्वारे में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी पड़ी है।

सिखों के नौवें धर्म-गुरु (सतगुरु) तेग बहादुर जी बैसाख पंचमी संवत 1678 (1 अप्रैल, 1621) को अमृतसर में गुरु हरगोबिन्द साहिब जी के घर पर अव‍तरित हुए थे। इस दिन को ‘गुरु तेग बहादुर जयंती’ या उनके ‘प्रकाश पर्व’ के रूप में मनाया जाता है। नानक शाही पंचांग के अनुसार इस साल गुरु तेग बहादुर जयंती 24 अप्रैल को मनाई जा रही है। धर्म और आदर्शों के लिए शहीद होने वाले महापुरुषों में गुरु तेग बहादुर जी की गिनती होती है।

दिल्ली में 30 मार्च 1664 को ज्योति-जोत समाते समय गुरु हर किशन जी ने तेग बहादुर को गुरु पद पर नियुक्त किया था। मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में हिंदुओं पर बेइतंहा अत्‍याचार किए जा रहे थे। उन्‍हें जबरन इस्‍लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा था। औरंगजेब के अत्‍याचारों से त्रस्‍त कश्‍मीरी पंडितों ने अपनी रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर जी से मदद मांगी थी। औरंगजेब ने गुरुजी से इस्‍लाम धर्म अपनाने को कहा था, जिस पर उन्‍होंने इनकार कर दिया था। जिसके बाद औरंगजेब ने गुरु जी को मौत की सजा सुनाई थी। गुरु जी ने कश्‍मीरी पंडितों की खातिर हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहूति दे दी। गुरुद्वारा शीश गंज साहिब का निर्माण गुरु तेगबहादुर की याद में किया गया था। यहां पर गुरुजी ने अपनी शहादत दी थी। गुरु जी के शहीदी स्थल पर बने गुरुद्वारा शीशगंज में हर साल लाखों सिख और हिंदू श्रद्धालु मत्‍था टेकने आते हैं।

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